आप अभी तक कितने ऐसे स्थलों पर जा चुके हैं जिसकी आधी सैर अंर्तराष्ट्रीय सीमा पर होती हो। बहुत सारी नहीं या फिर शायद कोई भी नहीं। लेकिन अगर आप ऐसे क्षेत्र की सैर करना चाहते हैं तो लॉन्गवा गांव में जरूर आएं। इस मामले में लॉन्गवा गांव आपकी इच्छा पूरी करेगा। इस गांव के बारे में दिलचस्प बात यह है कि इस गांव के अंग ( मुखिया ) का आधा घर भारत में है और आधा घर म्यांमार में।
परंपरा के अनुसार, गांव पर नियंत्रण, अंग और गांव परिषद अध्यक्ष के हाथों में है। गांव के अंग की 60 पत्नियां हैं। लॉन्गवा गांव के लोगों के पास दो राष्ट्र की नागरिकता है क्योकि वो एक ही समय में दो देशों में रहते हैं। लॉन्गवा गांव में कोन्यक्ष भी निवास करते हैं।
जब से कोन्यक्ष को सिर शिकारी के रूप में जाना गया है तभी से वहां के घरों में उनके द्वारा शिकार किए गए खोपडि़यों को घर की सजावट के काम में लाया जाता है और प्रचलन पूरे गांव में है। यह गांव पूरे जिले का सबसे बड़ा गांव है। पर्यटक इस गांव में आकर आराम से ठहर सकते हैं, यहां चर्च के अधिकारियों के द्वारा तीन कमरों का पर्यटक कुटीर चलाया जाता है जिसमें आंगतुकों के ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था है।



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