इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया को उर्दू भाषा सिखाने का बहुत शौख था। उन्होंने उर्दू और फारसी भाषाओं को पढ़ाने के लिए इंग्लैंड में भारत से उनके महल में एक मुंशी मजहर अली को बुलाया। मुंशी की सेवा से खुश होकर उन्हों ने उस के लिए मंडावर में एक महल बनवाया, जो 1850 में मंडावर के महल के नाम से जाना जाता है।
महल गल्खा देवी से मंदिर से आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ कुन्दनपुर गांव के पास मंडावर ब्लावली रोड पर स्थित है। माना जाता है की रुक्मणी पूजा के लिए इस जगह आई थी जब भगवान कृष्ण उन्हें यहाँ से भगा ले गाये थे। जो पर्यटक और तीर्थयात्रि मंडावर का महल घुमने आते है वो गल्खा देवी मंदिर के जरुर दर्शन करते है।



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