सीता कुंड गर्म पानी का एक झरना है और ग्रिल्ड (चारों ओर जालियों से घिरा) है। पर्यटक पूरे वर्ष यहाँ की सैर करते हैं परन्तु माघ महीने की पूर्णिमा को इसका अलग महत्व होता है। एक लोककथा के अनुसार जब सीता लपटों में से प्रकट हुई थी तब उन्होंने अपने शरीर की जलन बुझाने के लिए उन्होंने इस कुंड में स्नान किया।
यह स्थान इसलिए भी प्रसिद्ध है क्योंकि यहाँ राम कुंड स्थित है जो ठंडे पानी का झरना है तथा यह सीता कुंड के सामने स्थित है। पश्चिम दिशा में तीन जलाशय हैं जिनका नाम लक्ष्मण कुंड, शत्रुघ्न कुंड और भरत कुंड है जिनका नाम भगवान राम के तीन भाईयों के नाम पर पड़ा है।



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