पांचवी शताब्दी की नालंदा विश्वविद्यालय के खुदाई किये गए अवशेष 14 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैले हुए हैं। संरचनाएं बहुत विस्तृत हैं और बगीचों का रखरखाव भी अच्छी तरह से किया गया है। बीच का एक रास्ता इमारत को बगीचे के दोनों ओर विभाजित करता है। यह रास्ता दक्षिण से उत्तर की ओर जाता है जो यह प्रमाणित करता है कि इस विश्वविद्यालय का निर्माण वास्तुकला की कुषाण शैली में किया गया था।
इस रास्ते के पूर्व में ‘विहार’ या मठ हैं और पश्चिम में मंदिर या ‘चैया’ है। कुछ संरचनाओं पर सुंदर नक्काशी की गई है। सबसे रोचक विहार 1 है। इसकी दो मंजिलों पर कक्षाएं हैं और इन्हें एक बरामदे के चारों ओर बनाया गया है। यहाँ सीढीयाँ एक मंच की ओर ले जाती हैं जहाँ शायद शिक्षक विद्यार्थियों को पढ़ाते होंगे।
इसमें भगवान् बुद्ध की एक आधी टूटी हुई मूर्ती भी है। मंदिर 3 पिरामिड के आकार की एक विशाल संरचना है जो परिसर की सबसे बड़ी संरचना है। इस मंदिर के शीर्ष पर जाकर इस संपूर्ण क्षेत्र की सुंदरता को देखा जा सकता है। इस मंदिर के परिसर में कई स्तूप हैं जिनमें भगवान् बुद्ध की अलग अलग मुद्राओं में कई छोटी बड़ी मूर्तियाँ हैं। यह मंदिर फोटोग्राफरों को अपनी ओर आकर्षित करता है।



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