काबुली बाग में गार्डन, एक मस्जिद और एक टैंक बना हुआ है जिसे मुगल सम्राट बाबर ने पानीपत की पहली लड़ाइ्र में इब्राहिम लोधी पर अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए बनवाया था। उसने इस मस्जिद और गार्डन का नाम अपनी पत्नी मुस्समत काबुली बेग़म के नाम पर रखा था।
छः साल के बाद, उसके बेटे हुमायूं ने सलीम को हराने के बाद इस स्मारक में पत्थरों का एक बधाई मंच या ’चबूतरा’ बनवाया जिसे ’फतेह मुबारक’ कहा जाता है। 1557 ई. के अनुसार इस शिलालेख पर 934 हिजरी की तारीख है। इस मस्जिद के दोनों ओर दो कक्ष बने हुए हैं। इसके चारों ओर लगी हुई रेलिंग पर फारसी शिलालेख बने हुए है।
मस्जिद में चोकोर आकार में बने प्रार्थना हाल के चारों ओर उपभवन बने हुए हैं, जिनमें से प्रत्येक के नौ खंड हैं और निचले ड्रमों पर अर्ध-गोलाकार गुंबद बने हुए हैं। मस्जिद का ऊपरी हिस्से पर चूने का पलस्तर करके पैनलों में बाँटा गया है। मस्जिद, टैंक और गार्डन सहित पूरा स्मारक अभी भी सही आकार में पानीपत शहर से दो कि.मी. दूर मौजूद है।



Click it and Unblock the Notifications