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  • 01अक्‍ल दर्शीनी

    अक्‍ल दर्शीनी

    यह एक धार्मिक महत्‍व वाली झील है जो सुख सार झील से 1 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह झील 400 मीटर लम्‍बी और 200 मीटर चौड़ी है। समुद्र स्‍तर से इसकी ऊंचाई 3300 मीटर है। जो लोग बाकेरवालास जनजाति के होते है वह इस झील की पूजा करते है। व ह लोग जब भी इस झील के...

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  • 02नंदन सार

    नंदन सार

    नंदन सार, राजौरी जिले की सबसे बड़ी झील है। इस झील का आकार अंडे के जैसा है जो 1 किमी. के क्षेत्र में फैली हुई है। नंदन सार झील, समुद्र स्‍तर से 3500 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां पहुंचने के बाद पर्यटक देख सकते है कि गहराई में झील का पानी नीला है। नंदन सार झील का...

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  • 03मनमा माता मंदिर

    मनमा माता मंदिर

    मनमा माता मंदिर एक लोकप्रिय तीर्थ स्‍थल है जो राजौरी रोड पर स्थित है। यह मंदिर हिंदू धर्म की देवी माता मनमा को समर्पित है। यहां ध्‍यान यानि मेडीटेशन को ज्‍यादा महत्‍व दिया जाता है। आगंतुक यहां आकर पास में ही स्थित एक गुफा को भी देख सकते हैं।

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  • 04सुख सार

    सुख सार

    सुख सार इस गंतव्‍य स्‍थल की एक प्रसिद्ध झील है जो समुद्र स्‍तर से 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस झील का आकार ओवल शेप में है। यह झील राजौरी के पीर पंजाल रेंज में आती है जो उत्‍तरार्द्ध दिशा में स्थित है। 

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  • 05खेओरा

    खेओरा

    खेओरा एक गांव है जो राजौरी से 1.5 किमी. दूर राजौरी दरहाल लिंक रोड पर स्थित है। यह गांव पर्यटकों के बीच कुषाण अवधि में बने रेड वेव श्रेडस के लिए काफी लोकप्रिय है। रेड वेव श्रेडस को तेज धार से प्रकाशित एक दीप से प्रदर्शित किया जाता है। समय मिलने पर पर्यटक इस खास जगह...

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  • 06धनीधार फोर्ट

    धनीधार फोर्ट

    इस किले को 1855 ई. में राजौरी के पूर्व शासक मियां हाथू ने बनवाया था। शासक मियां हाथू राजैरी क्षेत्र के पूर्व शासक हुआ करते थे। इस किले को बनाने के लिए जाराल राजास ऑफ राजौरी व अन्‍य किलों की बची हुई साम्रगी को उपयोग में लाया गया था।

    किले का निर्माण करने...

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  • 07भाग सार

    भाग सार

    ओवल शेप की यह झील समुद्र स्‍तर से 3700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह झील बुद्धल पर्वत के समस्‍त पानी के स्‍त्रोतों में से सबसे ऊंचाई पर स्थित है। इस झील में चारों तरफ से बर्फ का पानी पिघल कर आता है। भाग सार झील के लेफ्ट साइड में चामार सार झील है। इसके...

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  • 08डेरा बाबा बीराम शाह

    डेरा बाबा बीराम शाह

    डेरा बाबा बीराम शाह राजौरी जिले के झंगार गांव में स्थित है। इस धार्मिक स्‍थल के नाम से ही स्‍पष्‍ट हो रहा है कि यह श्राइन बाबा बीराम शाह जी दत्‍त को समर्पित है। इसकी स्‍थापना 17 वीं सदी में की गई थी जिसे जम्‍मू में सिख धर्म को बढ़ावा देने...

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  • 09गुम सार

    गुम सार

    गुम सार झील, समुद्र स्‍तर से 3600 मीटर की ऊंचाई पर ढ़ाकयार चोटी के बेस पर स्थित है। यह इस स्‍थल की सबसे छोटी झील है।

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  • 10नादपुर सराय

    नादपुर सराय

    नादपुर सराय एक प्रसिद्ध गंतव्‍य स्‍थल है जो नाउशेरा से 10 किमी. की दूरी पर स्थित है। मुगल काल के दौरान इस जगह को शासकों द्वारा विश्राम स्‍थल बनाया गया था। नादपुर सराय में चारों तरफ दीवार बनी हुई है और छत बैटलमेंट पैर्टन की बनी हुई है।

    इस सराय...

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  • 11मंगला माता मंदिर

    मंगला माता मंदिर

    मंगला माता मंदिर, राजौरी शहर के झांगर गांव से 4 किमी. दूर बने नाउशेरा - झांगर सड़क पर बना हुआ है। जिसका निर्माण 1945 में करवाया गया था। स्‍थानीय लोगों के अनुसार कहा जाता है कि गांव के कई पुजारियों को सपने में देवी मां ने इस जगह पर मंदिर बनाने के लिए कहा था...

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  • 12मंगलादेवी किला

    मंगलादेवी किला

    मंगलादेवी किला, मंगलादेवी गांव में एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यह स्‍थल नाउशेरा शहर से 18 किमी. की दूरी पर है जिसे राजौरी में सबसे बड़ा गंतव्‍य स्‍थल माना जाता है। पर्यटकों के बीच प्रसिद्ध यह मजबूत दुर्ग, तीन तरफ पानी से घिरा हुआ है।

    इतिहास के...

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  • 13सामोट सार

    सामोट सार

    यह ओवल शेप की झील है जो समुद्र स्‍तर से 3550  मीटर की ऊंचाई पर बादजारी मार्ग पर उत्‍तर दिशा में स्थित है। 1 किमी. के क्षेत्र में फैली यह झील पर्यटकों को पसंद आती है। सामोट सार तक बुद्धल से पहुंचा जा सकता है। यहां से 4 घंटे की पैदल जर्नी के बाद इस झील...

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  • 14गुरूद्वारा चट्टी पटशाही बंगला साहिब

    गुरूद्वारा चट्टी पटशाही बंगला साहिब

    गुरूद्वारा चट्टी पटशाही बंगला साहिब गुरूद्वारे को राजौरी का प्रमुख धार्मिक स्‍थल माना जाता है। यह स्‍थल गुरू हरगोविंद साहिब जी को समर्पित है। कहा जाता है कि 1616 ई. में इस जगह सिख धर्म के 6 वें गुरू, गुरू हरगोविंद साहिब जी ठहरे थे और तत्‍कालीन सम्राट...

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  • 15नाओगाजी जियारत

    नाओगाजी जियारत

    यह जगह राजौरी के सबसे महत्‍वपूर्ण धार्मिक स्‍थलों में से एक है। 8 मीटर लंबी यह जियारत राजौरी के धनीधार किले के नजदीक स्थित पर्यटकों का मुख्‍य आकर्षण वाला गंतव्‍य स्‍थल है। नाओगाजी का अर्थ होता है - 9 साल। यहां कुतुब शाह वली की कब्र बनी हुई है।

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