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त्रियुगी नारायण, रुद्रप्रयाग

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रुद्रप्रयाग में स्थित ‘त्रियुगी नारायण’ यात्रा की एक पवित्र जगह है, माना जाता है कि सतयुग में जब भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया था तब यह ‘हिमवत’ की राजधानी था।  रोचक तथ्य यह है कि जिस हवन कुण्ड की अग्नि को साक्षी मानकर विवाह हुआ था वह अभी भी प्रज्वलित है।  मान्यता के आधार पर इस हवन कुण्ड की राख, भक्तों के वैवाहिक जीवन को सुखी रहने का आशीर्वाद देती है। 

इसी पवित्र स्थान के आस-पास ही एक विष्णु मंदिर भी है।  इस मंदिर की वास्तुशिल्प शैली भी केदारनाथ मंदिर की ही तरह है।  इस जगह के भ्रमण के दौरान पर्यटक रुद्र कुण्ड, विष्णु कुण्ड और ब्रह्म कुण्ड भी देख सकते हैं।  इन तीनों कुण्डों का मुख्य स्त्रोत ‘सरस्वती कुण्ड’ है।  मान्यताओं के अनुसार, इस कुण्ड का पानी भगवान विष्णु की नाभि से निकला है।  इस जगह को महिलाओं के बांझपन का इलाज करने के लिए भी जाना जाता है।

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