यांगखुल्लेन एक छोटा सा गांव है जो सेनापति शहर से 26 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह गांव सेनापति के इतिहास की झलक प्रदान करता है। यहां आज भी आधुनिकता के वाबजूद प्राचीन समाज और आर्थिक जीवन देखने को मिलता है। इन परम्पराओं को लोगों द्वारा सदियों से संरक्षित करके रखा गया है वो अपने संस्कृति और परंपरा को कभी नहीं बदलते।
आज भी इस क्षेत्र के लोग जिन उपकरणों का इस्तेमाल रोजमर्रा के जीवन में करते हैं वो काफी सदियों पुराना है। पूरा गांव एक बड़े परिवार की तरह मिलजुल कर रहता है जहां समुदाय के हिसाब से काम को बांटा जाता है। यह गांव कई तंग पहाडि़यों से होकर गुजरने वाले रास्तों के पार बसा हुआ है जहां से घाटी का दिल - थाम लेने वाला नजारा देखने का मिलता है जो पर्यटकों की यात्रा को सफल बना देता है।
इस पूरे गांव के लोग प्रकृति के पालक हैं वो हमेशा प्राकृतिक सौंदर्य को बचाते हैं, पर्यावरण की रक्षा करते हैं और शायद इसी कारण यहां आने पर्यटकों को अनूठा अनुभव और सुखद शांति मिलती है। वैसे यहां आकर कई दुर्लभ प्रजाति के पौधे भी देखने को मिलते हैं।



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