गुरूस्थान, शिर्डी की पावन धरती पर पवित्र स्थल है। जब बाबा 16 साल के थे तब वह पहली बार सभी को नीम के पेड़ के नीचे दिखाई पड़े। तब से इस पेड़ का नाम मारगोसा और इस स्थान का नाम गुरूस्थान पड़ गया। भक्तों का मानना है कि अगर यहाँ अगरबत्ती को जलाकर चिपका दिया जाऐ तो सभी रोगों से मुक्ति जाती है।
यहाँ बाबा की बड़ी सी फोटो भी लगी हुई है। यह स्थान भक्तों के लिए सुबह 5 से रात 10 तक खुला रहता है।



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