1857 ई. में बना इमामबाडा हसनाबाद श्रीनगर का दूसरा सबसे पुराना श्राइन है जहां प्रतिवर्ष हजारों शिया मुस्लिम समुदाय के लोग आकर दुआ करते हैं। शहर के दक्षिणी पश्चिम की ओर स्थित यह श्राइन तीन अन्य धार्मिक स्थलों चट्टी पदशाही, हजरतबल मस्जिद और मां शारदा देवी मंदिर के बीचों बीच स्थित है।
अष्टकोण आकार का यह पूरा श्राइन भारत-ईरान शैली में बना हुआ है। इस इमामबाड़े में पांच द्वार महिलाओं के लिए रिर्जव है। इस श्राइन के पास एक मुगल मुगल कब्रिस्तान भी है जिसे बाबा मजार कहा जाता है। कश्मीर के प्रसिद्ध संत बाबा अली, हब साहेब मुल्ला, कश्मीर के प्रमुख संत मारसिया और सैयद मिर्जा शाह जो 17 वीं सदी के महान कवि के रूप में विख्यात थे, इन सभी लोगों को उनकी मृत्यु के बाद इसी कब्रिस्तान में दफनाया गया था।



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