तमिलनाडु के विरुधिनगर जि़ले में स्थित श्रीविल्लीपुतुर राज्य के सबसे शुभ मंदिर नगरों में से एक है। यह जगह कई कारणों से प्रसिद्ध है। इस जगह का एक प्राचीन इतिहास है जिसमें इसकी अपनी विरासत का उल्लेख है। मंदिरों का यह शहर देशभर में प्रसिद्ध है ओर राज्य के लोग इन मंदिरों को बहुत शुभ मानते हैं।
इस जगह की जनसंख्या 73,183 है। पुरुषों की संख्या 36,411 है और महिलाओं की संख्या 36,772 है। इस शहर में 18,911 परिवार हैं। पालकोवा यहाँ बनाई जाने वाली पारंपरिक मिठाई है जो इस जगह को तमिल लोगों के बीच लोकप्रिय बनाती है। दूध और चीनी से बनी यह मिठाई बहुत स्वादिष्ट होती है।
यहाँ स्थित ग्यारह मीनारदार टावर इस शहर का लैंडमार्क हे क्योंकि यह भगवान श्रीविल्लीपुतुर को समर्पित है। भगवान को यहाँ वतपत्रसयी के रूप में जाना जाता है और बहुत शक्तिशाली माना जाता है। यहि जगह कुछ वार्षिक त्योहारों के लिए प्रसिद्ध है।
श्रीविल्लीपुतुर में और इसके आसपास के पर्यटन स्थान
मंदिरों के इस प्रसिद्ध शहर में अनेक रोचक स्थान है। श्री अंदल मंदिर सबसे महत्वपूर्ण है जो 108 दिव्य देशमों के बीच सबसे शुभ माना जाता है। यह स्थान भगवान विष्णु का महत्वपूर्ण निवास स्थान है जो यहाँ के देवता है।
तमिल इतिहास के दो सबे महत्वपूर्ण अलवर पेरित्झार और अंदल इसी जगह पैदा हुए थे। इसके अलावा, यहाँ वतपत्रसयी मंदिर भी है और इस मंदिर के देवता को रंगमन्नर के रूप में जाना जाता है। बाढ़ के दौरान, भगवान वास्तव में बरगद के पेड़ के पत्ते में एक बच्चे के रूप में रहते हैं। इस पत्ते को वतपत्र कहते हैं।
इस जगह के पास साथुरागिरि हिल्स भी स्थित है जहाँ आप भगवान सिद्धर का निवास स्थान भी देख सकते हैं। मदवर विलगम वैद्यनाथर मंदिर में 6 फीट लंबी नटराजर की मूर्ति पाई गई है। इस मंदिर का अपना भी एक प्राचीन इतिहास है। कत्तलगर के रूप में कल्लगर कत्तलगर कोइल मंदिर में स्थित है जो श्रीविल्लीपुतुर से 9कि.मी. दूर है।
यह मंदिर मतुंग हिल्स पर स्थित है। तीर्थथोट्टी का पानी पूरा साल इस जगह बहता है। कार फेस्टिवल के दौरान अनेक लोग आते हैं जिसे स्थानीय लोग थेर थिरुविझा फेस्टिवल कहते हैं। यह बहुत प्रसिद्ध उत्सव है। तमिल इतिहास और संस्कृति का एक समृद्ध दृश्य देखने के लिए राज्यभर से हज़ारों लोग यहाँ आते हैं।
इतिहास
कई सदियों पहले रानी मल्ली इस मंदिरों के शसर, श्रीविल्लीपुतुर की शासक थी। विल्ली और कंदन इस रानी के दो बेटे थे। जब ये दोनों जंगल में शिकार कर रहे थे तो एक बाघ ने कंदन को मार डाला था। जंगल में सोते हुए विल्ली को भगवान ने आकाशवाणी के द्वारा बताया कि उसके भाई के साथ क्या हुआ था। इस दिव्य आदेश के अनुसार विल्ली ने जंगल के बीच एक शहर की स्थापना की जो बेहद खूबसूरत था।
इस शहर का वास्तविक नाम विल्लीपुतुर था, लेकिन दिव्य भगवान श्री अंदल के जन्म के कारण इस शहर का नाम श्रीविल्लीपुतुर हो गया। थामिझ में यह थिरुविल्लीपुतुर के नाम से जाना जाता है। अनेक धार्मिक तमिल ग्रंथों में इस शहर का उल्लेख है और कई संतों ने इस शहर के नाम का उल्लेख अपने साहित्यिक कार्यों में किया था।
श्रीविल्लीपुतुर आने का सबसे अच्छा सीज़न
श्रीविल्लीपुतुर आने का सबसे अच्छा सीज़न निश्चित तौर पर वसंत है।
कैसे पहुँचे श्रीविल्लीपुतुर
यह जगह रेल और सड़क मार्ग से अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ी है। मदुरई श्रीविल्लीपुतुर के लिए निकटतम हवाईअड्डा है।



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