उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से आज, 3 जुलाई को चारधाम यात्रा पर बुरा असर पड़ा है। चमोली जिले के गुलाबकोटी के पास बद्रीनाथ नेशनल हाईवे (NH) पर पहाड़ का मलबा आने से रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल ट्रैफिक रोक दिया है। मानसून की इस बारिश ने सफर को काफी जोखिम भरा बना दिया है, जिससे हजारों श्रद्धालु रास्ते में फंसे हुए हैं। अगर आप भी यात्रा पर हैं, तो भारी देरी के लिए तैयार रहें।
सिर्फ बद्रीनाथ ही नहीं, केदारनाथ मार्ग पर भी सुरक्षा कारणों से यात्रियों को रुक-रुक कर आगे भेजा जा रहा है। ऊपर से गिरते पत्थरों और मलबे की वजह से कई चेकपॉइंट्स पर श्रद्धालुओं को रोका गया है। स्थानीय प्रशासन ने सलाह दी है कि जब तक रास्ता पूरी तरह साफ न हो जाए, तब तक आगे की यात्रा टाल दें। सोनप्रयाग और गौरीकुंड में हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। पहाड़ों के खतरनाक रास्तों को देखते हुए केवल दिन में ही सफर करें, रात के समय ड्राइविंग से हर हाल में बचें।

बद्रीनाथ और केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन: क्या करें यात्री?
जो यात्री इस समय रास्ते में हैं, उन्हें सुरक्षित जगहों पर रुकने की सलाह दी गई है। फिलहाल रुद्रप्रयाग, जोशीमठ या सोनप्रयाग जैसे इलाकों में रुकना सबसे बेहतर विकल्प है। सुरक्षित स्थान पर रुकने से सड़कों पर जाम नहीं लगेगा और प्रशासन को मलबा हटाने में आसानी होगी। लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें रास्ता साफ करने में जुटी हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश काम में बाधा डाल रही है। जब तक हाईवे खुलने की आधिकारिक सूचना न मिले, तब तक सुरक्षित और नेटवर्क वाले क्षेत्रों में ही रहें।
| स्थान | मौजूदा स्थिति | सलाह |
|---|---|---|
| गुलाबकोटी (चमोली) | नेशनल हाईवे बंद | जोशीमठ में रुकें |
| केदारनाथ मार्ग | रुक-रुक कर आवाजाही | सोनप्रयाग में इंतजार करें |
| हाईवे सुरक्षा | हाई रिस्क (जोखिम) | केवल दिन में सफर करें |
चारधाम यात्रियों के लिए जरूरी सेफ्टी टिप्स
घर से निकलने से पहले स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) के ताजा अपडेट्स जरूर चेक करें। अपने साथ जरूरी दवाइयां और अच्छी क्वालिटी के रेनकोट या छाता जरूर रखें। खराब मौसम की वजह से मंदिरों में दर्शन की लंबी लाइनें और टोकन मिलने में देरी हो सकती है। बिजली कटने की स्थिति के लिए पावर बैंक साथ रखना समझदारी होगी। मौसम के हिसाब से आरती के समय में बदलाव हो सकता है, इसलिए स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी लें। साथ ही, अपने होटल और ट्रांसपोर्ट की बुकिंग्स को भी री-चेक कर लें ताकि जरूरत पड़ने पर बदलाव किया जा सके।
उत्तराखंड की इस पावन यात्रा में आपकी सुरक्षा सबसे ऊपर है। प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करें ताकि आप सही फैसले ले सकें। सावधानी और सही प्लानिंग के साथ आप अपनी यात्रा सुरक्षित पूरी कर सकते हैं। पहाड़ों में स्थिति सामान्य होने तक धैर्य बनाए रखें और स्थानीय पुलिस व रेस्क्यू टीमों के निर्देशों का सम्मान करें। मौसम के इन बदलावों के बीच आपकी तैयारी ही आपके सफर को सुरक्षित बनाएगी।



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