15 सितंबर 2026 को मुंबई के गणेश पंडालों के दर्शन का प्लान है? तो इस बार महाप्रसाद काउंटरों पर नियम थोड़े सख्त मिलने वाले हैं। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने जमीनी स्तर पर जांच शुरू कर दी है। विभाग की तरफ से लाइसेंस वाले विक्रेताओं से सामान खरीदने, साफ-सफाई दुरुस्त रखने और कच्चा माल कहां से आया, इसका पूरा रिकॉर्ड रखने की सख्त हिदायत दी गई है। अंधेरी से लेकर वसई-विरार तक की हाउसिंग सोसायटियों में आयोजित होने वाले भंडारों के लिए भी पहले से सूचना देना जरूरी कर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य परंपरा और आस्था से समझौता किए बिना श्रद्धालुओं तक सुरक्षित महाप्रसाद पहुंचाना है। इसी सिलसिले में आज शहर के तमाम प्रमुख मंडलों में फूड इंस्पेक्टर्स की तैनाती की गई है।
बड़े और मशहूर पंडालों में ये बदलाव साफ नजर आ रहे हैं। वडाला स्थित GSB सेवा मंडल के मुताबिक, वॉलंटियर्स के लिए कैप पहनना अनिवार्य किया गया है, स्वच्छता का कड़ा ध्यान रखा जा रहा है और केवल शुद्ध देसी घी का ही इस्तेमाल हो रहा है। मंडल के प्रवक्ता ने कहा, "सप्लायर्स को क्वालिटी मेनटेन रखने के लिए खास निर्देश दिए गए हैं; हम पूरी तरह शुद्ध घी का उपयोग कर रहे हैं।" यह कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, इसके लिए शहरभर में मोबाइल टेस्टिंग लैब्स भी उतारी गई हैं। दूसरी ओर, लालबागचा राजा के पहले दिन की आरती का शेड्यूल पूरी तरह से व्यस्त बना हुआ है।

पंडालों में प्रसाद और सफाई के लिए FDA के नए नियम: जानें आज क्या बदला
गणेश मंडलों को अब प्रसाद की सामग्री केवल भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) से रजिस्टर्ड विक्रेताओं से ही खरीदनी होगी। साथ ही पक्के बिल का रिकॉर्ड रखना और दान में मिली सामग्री की पूरी एंट्री करना अनिवार्य है। आयोजकों के एक प्रतिनिधि ने बताया, "प्रसाद में इस्तेमाल होने वाला हर खाद्य पदार्थ FSSAI रजिस्टर्ड वेंडर से ही आएगा।" कागजी कार्रवाई और सामान के स्रोत की जानकारी रखने का यह नियम छोटे मंडलों पर भी लागू होता है। सितंबर की शुरुआत से ही एफडीए का चार चरणों वाला जांच अभियान पूरी तरह एक्टिव है।
सोसायटी भंडारे के लिए सूचना के नियम
अगर कोई हाउसिंग सोसायटी महाप्रसाद या भंडारे का आयोजन कर रही है, तो उसे कम से कम सात दिन पहले स्थानीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी को एक साधारण आवेदन पत्र भेजकर सूचना देनी होगी। यदि सोसायटी के निवासी खुद भोजन बना रहे हैं, तो विभाग की सलाह है कि 'फूड सेफ्टी कंप्लायंस सिस्टम' (FosCoS) पोर्टल पर अस्थायी रजिस्ट्रेशन कराएं और आयोजन स्थल पर 'फूड सेफ्टी कनेक्ट' शिकायत QR कोड भी लगाएं।
FDA के आदेश के तहत क्या मंजूर है और क्या बैन?
| किसकी अनुमति है (सबूत/बिल के साथ) | किस पर होगी कार्रवाई / क्या है बैन |
|---|---|
| FSSAI से लाइसेंस प्राप्त सप्लायरों का पैक्ड घी और तेल, पक्के बिल के साथ। | खुला एडिबल ऑयल या घी; 25 प्रतिशत TPC से ज्यादा इस्तेमाल किया जा चुका तेल। |
| फूड-ग्रेड बर्तन; RO या पीने योग्य पानी; कैप, मास्क और ग्लव्स। | अखबार में लपेटा गया खाना; चांदी के वरक की जगह एल्युमीनियम वर्क का इस्तेमाल। |
इस आदेश के तहत दूध से बने उत्पादों, खाने के तेल, रंगों और सूखे मेवों (ड्राई फ्रूट्स) की सैंपलिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही 'शेड्यूल-4' हाइजीन चेकिंग अनिवार्य की गई है और ज्यादा TPC वाले तले हुए तेल को तुरंत नष्ट करने का निर्देश है। ऐसी पैकेजिंग जिससे मिनरल ऑयल का रिसाव हो सकता है, उस पर रोक लगाई गई है और नकली वरक का इस्तेमाल करने वालों पर भारी जुर्माना तय किया गया है।
श्रद्धालुओं के लिए काम की बातें और तुरंत शिकायत दर्ज कराने के तरीके
अगर आप दर्शन के लिए निकल रहे हैं, तो आरती के समय का ध्यान रखकर योजना बनाएं। लालबागचा राजा की पहले दिन की आरती की लाइव स्ट्रीमिंग की जा रही है, वहीं GSB मंडल में हर दिन हजारों लोग महाप्रसाद ग्रहण करते हैं। GSB में सुबह की सेवा तड़के शुरू हो जाती है, जिससे कतारें तेजी से आगे बढ़ती हैं। पास की दुकानों पर 'उकडीचे मोदक' के 6 पीस का बॉक्स करीब 255 रुपये में मिल रहा है, जबकि सिंगल पीस का दाम लगभग 30 रुपये है। अगर आपको कहीं साफ-सफाई या क्वालिटी में कोई कमी दिखे, तो FSSAI के 'फूड सेफ्टी कनेक्ट' ऐप या महाराष्ट्र एफडीए के शिकायत पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1800112100 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
आज लागू किए गए इन कड़े नियमों का मकसद मोदक और महाप्रसाद का आनंद बनाए रखते हुए लोगों की सेहत की सुरक्षा करना है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इसका मतलब है—ज्यादा साफ-सुथरे काउंटर और शुद्ध महाप्रसाद, बिना किसी स्थानीय स्वाद को खोए। दर्शन के लिए निकलते वक्त पानी की बोतल साथ रखें, वर्किंग डेज पर सुबह जल्दी पहुंचने की कोशिश करें और निकलने से पहले मंडलों के ताजा अपडेट जरूर देख लें। अगर प्रसाद की गुणवत्ता पर जरा भी संदेह हो, तो ब्योरा दर्ज करें और मौके पर ही शिकायत दर्ज कराएं।



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