संदीपनी आश्रम उज्जैन के मंदिर के शहर से दो किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। इस जगह का पौराणिक महत्व है। ऐसा माना जाता है कि गुरु संदीपनी इस आश्रम का उपयोग श्रीकृष्ण, उनके मित्र सुदामा और भाई बलराम को पढ़ाने के लिए करते थे। इस जगह का उल्लेख महाभारत में किया गया है।
अब इस आश्रम को एक मंदिर में परिवर्तित कर दिया गया हे जो गुरु संदीपनी को समर्पित है। इस आश्रम के पास एक पत्थर पर 1 से 100 तक गिनती लिखी है ओर ऐसा माना जाता है कि यह गिनती गुरु संदीपनी द्वारा लिखी गई थी। संदीपनी आश्रम के पास गोमती कुंड स्थित है जो कि एक छोटी पानी की टंकी है।
ऐसा माना जाता है कि श्रीकृश्ण ने पवित्र केंद्रों के सारे पानी को गोमती कुंड की ओर मोड़ दिया था ताकि गुरु संदीपनी को आसानी से पवित्र जल मिलता रहे। गुरु संदीपनी के समय में इस आश्रम में युद्ध कलाएँ भी सिखाई जाती थी तथा दिन के अंत में आध्यात्मिक संरेखण ही मुख्य उद्येश्य था।



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