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  • 01संदीपनी आश्रम

    संदीपनी आश्रम

    संदीपनी आश्रम उज्जैन के मंदिर के शहर से दो किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। इस जगह का पौराणिक महत्व है। ऐसा माना जाता है कि गुरु संदीपनी इस आश्रम का उपयोग श्रीकृष्ण, उनके मित्र सुदामा और भाई बलराम को पढ़ाने के लिए करते थे। इस जगह का उल्लेख महाभारत में...

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  • 02गोपाल मंदिर

    गोपाल मंदिर

    गोपाल मंदिर, उज्जैन के प्रसिद्ध स्थानों में से एक है तथा यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस मंदिर को द्वारकाधीश मंदिर भी कहा जाता है। यह मंदिर 19वीं सदी में बयाजीबाई शिदे द्वारा बनवाया गया था। बयाजीबाई महाराज दौलत राव शिदे की रानी थी।

    यह मंदिर मराठा...

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  • 03भृतृहरि गुफाएँ

    भृतृहरि गुफाएँ

    भृतृहरि गुफाएँ, मध्य प्रदेश में शिप्रा नदी के किनारे स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। ये गुफाएँ उज्जैन के प्राचीन शहर के पास है। यह जगह मध्य प्रदेश पर्यटन मंत्रालय के द्वारा एक सुंदर स्थल माना जाता है। इन गुफाओं के अंदर जाने पर एक अद्भुत अनुभव का अहसास...

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  • 04दुर्गादास की छतरी

    दुर्गादास की छतरी

    दुर्गादास की छतरी उज्जैन के मंदिरों के शहर में स्थित एक विशिष्ट स्मारक है। यह स्मारक छतरी के रूप में वीर दुर्गादास की याद में बनवाया गया था जो कि राजपूताना इतिहास में एक महान शख्सियत है। वीर दुर्गादास ने महाराज जसवंत सिंह की मृत्यु के बाद मुग़लों से लड़ाई की और...

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  • 05कालियादेह महल

    कालियादेह महल

    कालियादेह महल उज्जैन के मंदिर के शहर के सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। यह महल बहुत समय पहले वर्ष 1458 ई. में मांडू के सुल्तान द्वारा बनवाया गया था। यह महल शिप्रा नदी के बीच एक द्वीप पर स्थित है। पिंडारियों के समय यह महल पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया...

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  • 06मंगलनाथ

    मंगलनाथ

    मंगलनाथ उज्जैन के प्राचीन शहर में स्थित भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र मंदिर है। यह मंदिर मुख्य शहर के शोर और भीड़भाड़ से दूर स्थित है। यह मंदिर शिप्रा नदी के पास स्थित है। मत्स्य पुराण के अनुसार ऐसी मान्यता है कि मंगलनाथ मंगल ग्रह का जन्म स्थान है।

    इस...

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  • 07सिद्धवट

    सिद्धवट

    सिद्धवट उज्जैन के पवित्र शहर में स्थित है। इस जगह के पास ही शिप्रा नदी बहती है। इस जगह को इसकी पवित्रता के कारण प्रयाग का अक्षयवट कहा जाता है। यहाँ आने पर आप शिप्रा नदी में प्रचुर मात्रा में कछुए देख सकते हैं।

    सिद्धवट घाट अंतिम संस्कार के बाद की...

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  • 08बड़े गणेश जी का मंदिर

    बड़े गणेश जी का मंदिर

    बड़े गणेश जी का मंदिर मंदिरों के शहर उज्जैन में स्थित है तथा यह पूरे शहर में स्थित पारंपरिक मंदिरों में से एक माना जाता है। स्थानीय लोगों तथा गणेश भगवान की एक झलक पाने के लिए दूर स्थानों से आने वाले हज़ारों भक्तों द्वारा इस देवता को शुभ माना जाता है।

    यह...

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  • 09काल भैरव

    काल भैरव

    उज्जैन के मंदिरों के शहर में स्थित काल भैरव मंदिर प्राचीन हिंदू संस्कृति का बेहतरीन उदाहरण है। ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर तंत्र के पंथ से जुड़ा है। काल भैरव भगवान शिव की भयंकर अभिव्यक्तियों में से एक माना जाता है। सैकड़ों भक्त इस मंदिर में हररोज़ आते हैं और आसानी...

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  • 11कालिदास अकादमी

    कालिदास अकादमी

    कालिदास अकादमी उज्जैन के मंदिरों के शहर में वर्ष 1978 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित एक बहु-अनुशासनात्मक संस्था है। कवि कालिदास भारतीय साहित्य के इतिहास में महान व्यक्तियों में से एक है और इस महान व्यक्ति को श्रद्धांजलि देने के लिए इस संस्था को स्थापित किया...

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  • 12हरसिद्धि मंदिर

    हरसिद्धि मंदिर

    हरसिद्धि मंदिर उज्जैन के मंदिरों के शहर में एक महत्वपूर्ण मंदिर है। यह मंदिर देवी अन्नपूर्णा को समर्पित है जो गहरे सिंदूरी रंग में रंगी है। देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति देवी महालक्ष्मी और देवी सरस्वती की मूर्तियों के बीच विराजमान है। श्रीयंत्र शक्ति की शक्ति का...

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  • 13गढ़कालिका

    गढ़कालिका

    गढ़कालिका, उज्जैन के मंदिरों के शहर के उपनगरीय भागों पर स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है और मध्य प्रदेश के पर्यटन मंत्रालय द्वारा अनुशसित देखने योग्य पर्यटन स्थलों में से है। यह मंदिर कालिका देवी को समर्पित है जो हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार बहुत शक्तिशाली देवी है।

    ...
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  • 14महाकालेश्वर मंदिर

    महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन के पवित्र शहर में हिंदुओं के सबसे शुभ मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मंदिर एक झील के पास स्थित है। इस मंदिर में विशाल दीवारों से घिरा हुआ एक बड़ा आंगन है। इस मंदिर के अंदर पाँच स्तर हैं और इनमें से एक स्तर भूमिगत है। दक्षिणमूर्ति...

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  • 15संदलवाला भवन

    संदलवाला भवन

    संदलवाला भवन का निर्माण 1925 में किया गया था। यह इमारत फिदा हुसैन अब्दुल हुसैन संदलवाला के द्वारा बनाई गई थी। इस इमारत में प्राचीन भारतीय वास्तुकला का उपयोग किया गया है तथा बहुत से लोगों का ऐसा मानना है कि वर्तमान समय की इमारतों में ऐसी वास्तुकला का उपयोग नहीं...

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