यात्रियों को कल्लू बसादी (डोड्डा बसादी) के दाहिनी तरफ स्थित 24 तीर्थांकर बसादी को देखने की सलाह दी जाती है। बसादी पर पहुँचने पर मन्दिर के दाहिनी तरफ पर्यटकों को एक शिलालेख मिलता है जिसपर इसके 1537 ई0 में निर्मित होने की जानकारी अंकित है।
यात्रियों को खड़ी मुद्रा (कडगासन) में 24 अलग-अलग तीर्थांकरों की प्रतिमायें एक कतार में देखने को मिल जायेंगीं। तीर्थांकर प्रतिमाओं के दाहिनी तरफ देवी सरस्वती और बायीं ओर देवी पद्मावती की प्रतिमायें भी देखी जा सकती हैं। पद्मावती को कर्नाटक में जैनियों द्वारा अम्मनावारा कहा जाता है। इसलिये 24 तीर्थांकर वसादी को अम्मनावारा बसादी भी कहा जाता है।



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