अगर पर्यटकों के पास समय हो तो उन्हें कल्लू बसादी या डोड्डा बसादी को भी देखना चाहिये। इस बसादी को पथरीले चट्टानों का उपयोग करके बनाया गया है इसलिये इसे कल्लू बसादी कहते हैं। एक आलीशान आँगन होने के कारण इस जगह को डोड्डा बसादी (बड़ी बसादी) भी कहते हैं। कल्लू बसादी पहुँचने पर पर्यटकों को शान्तिनाथ की 5 फीट ऊँची प्रतिमा देखने को मिलती है। मूर्ति के दोनों ओर पत्थर से बनी याक्षी महामानसी और यश गरूण की प्रतिमाये देखी जा सकती हैं। कल्लू बसादी का मुख्य आकर्षण यहाँ के तीर्थांकर प्रतिमा को ध्यानमग्न पद्मासन मुद्रा में देखा जा सकता है।
कल्लू बसादी के अन्दर ही चन्द्रनात और महावीर नाम के दो अन्य तीर्थांकरों की प्रतिमायें बी रखी हैं। बारीकी से देखने पर पर्यटकों को 24 तीर्थांकरों की काँस्य मूर्तियों के आधार पर शिलालेख देखने को मिलेगें। इन आधार भागों को हरी पिता नाम दिया गया है।
कल्लू बसादी के प्रवेशद्वार के बाहरी हिस्से को स्लेटी पत्थर से बनाया गया है। गर्भगृह में यात्री दाहिनी तरफ सरस्वती की मूर्ति तथा बायीं ओर पद्मावती देवी की मूर्ति को देख सकते हैं। इन मूर्तियों की उपस्थिति के कारण इसे अम्मनावारा बसादी भी कहते हैं।



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