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डलहौजी - कालातीत आकर्षण

डलहौजी, हिमाचल प्रदेश में स्थित धौलधार रेंज में बना एक टूरिस्‍ट प्‍वांइट है। डलहौजी को सन् 1854 में एक ब्रिटिश गर्वनर लार्ड डलहौजी ने स्‍थापित किया था ताकि वह गर्मियों में सुकून भरे पल किसी ठंडी और शांत जगह पर बिता सकें। डलहौजी, पांच पहाडियों पर बना नगर है जिनके नाम काथलॉग, पोर्टएन, तेहरा, बाकरोता और बालून है जो कुल 13 वर्ग किमी. के क्षेत्र में फैली हुई है।

डलहौजी - सुभाष बावली से देखने पर
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धौलाधर रेंज को ब्रिटिश और उनके संगी-साथियों ने चुना था कि यहां एक पर्यटन स्‍थल बनाया जा सकता है। उस समय ब्रिटिश साम्राज्‍य का जनरल लार्ड नेपियर हुआ करता था जिसने इस पहाड़ी स्‍थल पर ऊंचाई पर एक अस्‍पताल खोलने का प्रस्‍ताव भी रखा था ताकि चंवा के लोगों की कई गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा सके। डलहौजी क्षेत्र में कई ऐसे स्‍थल हैं जहां पर्यटक घूमने जा सकते हैं। यहां पर्यटक सबसे ज्‍यादा चर्च जाना पसंद करते हैं। यहां का सेंट एंड्रयू, सेंट पेटरिक, सेंट फ्रांसिस चर्च, सेंट जॉन चर्च आदि प्रसिद्ध स्‍थल हैं। यहां के जानद्ररीघाट महल जो चंबा शासकों ने बनवाया था, इसकी वास्‍तुकला पर्यटकों को खासा प्रभावित करती हैं।

यहां के पंचपुला और सुभाष बाओली में भारत की आजादी के लिए अजीत सिंह और सुभाष चंद्र बोस ने कई प्रयास किए थे। पर्यटक यहां आकर केवल धार्मिक और प्राकृतिक स्‍थलों का आनंद ही नहीं बल्कि साहसिक खेलों का मजा भी उठा सकते हैं। यहां के त्रिउंद, धर्मशाला, देनकुंड, खज्‍जर, चंबा, पालमपुर, बैजनाथ, बीर और बीलिंग एडवेंचर प्‍वांइट हैं। साथ ही डलहौजी के पास स्थित चौबिया पास, गांधी चौक, भारमुर, चंबा एच पी, गरम सड़क अल्‍हा वॉटर टैंक और बजरेश्‍वरी देवी मंदिर जगह भी टूरिस्‍ट प्‍वांइट हैं।

डलहौजी में भूरी सिंह संग्रहालय स्थित है जिसे 1908 में राजा भूरी ने दान किया था। कला प्रेमी यहां आकर सुंदर चित्रों को देख सकते हैं। इस संग्रहालय में मूल्‍यवान शारदा लिपि भी रखी हुई है। इसके अलावा, डलहौजी में रंग महल काफी विख्‍यात है जिसे राजा उमेद सिंह ने मुगल और ब्रिटिश वास्‍तुकला में बनवाया था। इस महल की दीवारों पर पंजाबी शैली के चित्र लगे हुए हैं जो भगवान कृष्‍ण के जीवन के पहलुओं को दर्शाते हैं। इसके बाद पर्यटक यहां के म्‍यूजियम काम्‍पलेक्‍स में स्थित हिमाचल एम्‍पोरियम से हस्‍तनिर्मित रूमाल, लकड़ी करघा की शॉल और चप्‍पल खरीद सकते हैं। 

डलहौजी की जलवायु साल भर सुखद रहती है। यहाँ गर्मियों में तापमान 15.5 से 25.5 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। मार्च से जून के महीने में पर्यटक यहां घूमने आ सकते है। जून के बाद यहां बारिश होने लगती है जो सितम्‍बर तक चलती है। सर्दियों में यहां का तापमान 1 से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। अधिकतर सर्दियों में ही डलहौजी आना पसंद करते हैं। 

डलहौजी समुद्र स्‍तर से 2700 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है। सर्दियों के दौरान यहां भयंकर बर्फबारी होती है। डलहौजी, भारतीय राजधानी दिल्ली से 563 किमी. , अमृतसर से 191 किमी., चंबा से 56 किमी. और चंडीगढ़ से 300 किमी. की दूरी पर स्थित है। यहां के लिए निकटतम एयरपोर्ट पठानकोट है जो डलहौजी से 80 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह हवाई अड्डा दिल्‍ली के एयरपोर्ट से जुड़ा हुआ है।

यहां आने के लिए जम्‍मू एयरपोर्ट भी दूसरा ऑप्‍शन है जो शहर से 180 किमी. की दूरी पर स्थित है, यह एयरपोर्ट, देश के कई शहरों से भली-भांति जुड़ा हुआ है।  रेल से आने वाले यात्री पठानकोट के रेलवे स्‍टेशन तक आ सकते है यहां से देश के कई शहरों जैसे - दिल्‍ली, मुम्‍बई और अमृतसर आदि के लिए ट्रेन चलती हैं। पर्यटक अगर डलहौजी तक बस से जाना चाहते हैं तो उन्‍हे दिल्‍ली और चंडीगढ़ जैसे शहरों से बस मिल जाएगी और सस्‍ती और सुविधाजनक होगी। दिल्‍ली से डलहौली तक की बस यात्रा में पर्यटकों को 560 किमी. का सफर तय करना होगा।

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