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हरिहरेश्वर - ऐतिहासिक महत्व

हरिहरेश्वर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित एक अनोखा छोटा शहर है। चार पहाड़ियों ब्रह्माद्री, पुष्पाद्री, हर्षिनाचल और हरिहर से घिरा हुआ हरिहरेश्वर कोंकण क्षेत्र में है और एक ओर से हरे भरे जंगलों और दूसरी ओर से प्राचीन समुद्र तटों से घिरा हुआ है।यह जगह हरिहरेश्वर मंदिर के लिए प्रसिद्द है, जो भगवान शिव को समर्पित है, यही कारण है कि इसे देवघर भी कहा जाता है – भगवान का घर। यहाँ सावित्री नदी अरब सागर से मिलती है।

सीजन में हरिहरेश्वर
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हरिहरेश्वर का उद्भव मराठा शासनकाल में महान शासक शिवाजी के समय हुआ था। प्रथम पेशवा शासक बाजीराव सन 1723 में यहाँ आए थे। यहाँ के अनेक मंदिरों और स्मारकों की प्राचीन वास्तुकला उस समय अपनाई गई भारतीय वास्तुकला शैली के प्रमाण हैं। प्रत्येक मंदिर की मूर्ति से एक कहानी जुड़ी हुई है – अनेक हिंदू प्राचीन कथाएँ जो आपको मन्त्रमुग्ध कर देंगी।

हरिहरेश्वर – एक धार्मिक केंद्र

हरिहरेश्वर एक प्रमुख धार्मिक स्थान है और इसे दक्षिण काशी भी कहा जाता है। यह विभिन्न देवों भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रम्हा के मंदिरों का घर है। कालभैरव मंदिर और योगश्वरी मंदिर अन्य दो धार्मिक स्थान है।हरिहरेश्वर अपने खूबसूरत समुद्र तटों के लिए प्रसिद्द है जो वीकेंड (सप्ताह का अंत) के लिए आदर्श स्थान है। पास स्थित पुष्पाद्री पहाड़ी संपूर्ण स्थान की सुंदरता को ओर बढाती है।

हरिहरेश्वर क्यों जाएँ

परिवहन के सभी प्रकार के साधनों हवाई यात्रा, रेल या रास्ता किसी के भी द्वारा हरिहरेश्वर तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। यहाँ साल भर में कभी भी आया जा सकता है फिर भी मानसून के बाद का समय और ठंड का मौसम इस छोटे से गाँव को घूमने के लिए उपयुक्त है। हरिहरेश्वर न सिर्फ अपने मंदिरों बल्कि अपने सुंदर समुद्र तटों के कारण भी सालाना भारी भीड़ को आकर्षित करता है। व्यस्त दुनिया से कुछ शांत पल प्राप्त करने के लिए यह एक आदर्श स्थान है। सुखद वातावरण, सुंदर समुद्र तट, ग्रामीण मंदिर – हरिहरेश्वर में सब कुछ है।

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