सिविल कोर्ट के पास महात्मा गांधी रोड से पूर्व की ओर स्थित रोमन कैथोलिक कब्रिस्तान उत्तर भारत का सबसे पुराना कैथोलिक कब्रिस्तान है। चहारदीवारी से घिरा अपेक्षाकृत छोटे इस कब्रिस्तान में यूरोप और भारत के कई ऐतिहासिक शख्सियत, शिल्पकार और सिपाही की समाधियां है।
हॉलैंड के एक किराए का सैनिक कर्नल जॉन विलियम हेसिंग का कब्र मुख्य द्वार के पास ही है। वह 1700 ईस्वी में भारतीय उपमहाद्वीप में आया था और बाद में यहीं उनकी मृत्यु हो गई थी। कर्नल हेसिंग का परिवार उनकी याद में ताजमहल के कतार में एक मकबरा बनाना चाहता था। पर संसाधनों की कमी से वे ऐसा नहीं कर पाए और रोमन कैथोलिक कब्रिस्तान में उनका मकबरा बनवाया, जो दिखने में ताजमहल का छोटा रूप प्रतीत होता है।
साधारण सा यह वर्गाकार मकबरा लाल बलुआ पत्थर से बना है। चूंकि उनका परिवार मकबरे की महंगी सजावट में समर्थ नहीं था, इसलिए इसमें फूलदार डिजाइन की गई है। इस कब्रिस्तान में कई प्रसिद्ध ऐतिहासिक शख्सीयत की समाधियां हैं। इसमें मुगल दरबार में अंग्रजी राजदूत जेनरल पेरन, जॉन माइडेनहॉल और इटली के वास्तुशिल्प जेरोम वेरोनियो प्रमुख हैं।



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