अमरनाथ – एक पौराणिक गाथा

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अमरनाथ हिन्दी के दो शब्द “अमर” अर्थात “अनश्वर” और “नाथ” अर्थात “भगवान” को जोडने से बनता है। श्रीनगर से 145 कि.मी दूर स्थित अमरनाथ भारत का प्रमुख धार्मिक स्थान है। यह स्थान समुंदरी तट से 4175 मीटर की ऊंचाई पर है, और यहां का मुख्य आकर्षण “बर्फ का प्राकृतिक शिवलिंग” जो हिंदू भगवान शिव का प्रतीक है, इसे देखने हजारों श्रद्धालु आते हैं।

अमरनाथ की देवगाथा

एक पौराणिक कथा अनुसार, भगवान शिव ने लंबे समय से अपना अमरत्व रहस्य अपनी पत्नी देवी पार्वती को नहीं बताया, पर एक दिन जब पार्वती ने इस रहस्य को प्रकट करने के लिए कहा। तो भगवान शिव ने इस रहस्य को बताने के लिए उन्हें हिमालय के किसी एकान्त स्थान में ले गए जहाँ यह रहस्य कोई और ना सुन पाए। हिमालय जाते समय शिव ने अपने माथे के चाँद को चंन्द्रनबाडी में उतारा, नंदी को पहलगाम में छोडा। गले के नाग को शेषनाग नामक स्थान पर उतार कर, पुत्र गणेश को महागुण पर्वत पर छोडा। पार्वती संग गुफा के भीतर जाने से पहले अपने पाँचो तत्वों को पंचतरणी में उतार दिया। इस रहस्य को कोई ना सुने, इसके लिए भगवान शिव ने गुफा के अंदर आग जलाई और वहाँ के प्राणियों को मिटाया। इस पूरी क्रिया में, वे हिरण की खाल के नीचे पडे दो कबूतरों के अंडो का नाश करना भूल गए।

जब भगवान शिव यह रहस्य देवी पार्वती को बता रहे थे, तो इन अंडों में से दो कबूतर बाहर निकले, जिन्होंने यह सारा रहस्य चुप चाप सुन लिया। अमरनाथ गुफाओं की यात्रा करने आए श्रद्धालु, इन कबूतरों के जोडे को यहाँ देख पाएँगे। क्योंकि इन दोनों कबूतरों ने चुप चाप सारा रहस्य सुन लिया, वे पुनर्जन्म लेते रहते हैं, जिसके कारण उन्होंने अमरनाथ गुफाओं को ही अपना घर बना लिया है।

अमरनाथ की पौराणिक कथा

इस स्थान का वर्णन संस्कृत, कि 6 वी सदी की निलामाता पुराण में किया गया है। इस पुराण में कश्मीर के निवासियों के कर्मकांडों और सांस्कृतिक जीवन शैली का वर्णन है।

34 बी.सी में कश्मीर के राजा बने आर्यराजा का अमरनाथ स्थान संग गहरा रिश्ता था। इन्होंने अपने राजा अधिकार त्याग कर, गर्मियों में अक्सर बर्फ से बने इस “शिवलिंग” की पूजा करने जाया करते थे। राजतरंगिणी में अमरनाथ को अमरेश्वर भी कहा गया है।

अमरनाथ गुफा

1420 और 1470 के बीच जब सुल्तान जैन्ल अब्दिन ने अमरनाथ की यात्रा की, तो उन्होंने यहाँ शाह कोल नामक नहर का निर्माण किया। अमरनाथ की सैर दौरान, यात्री 3888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा देखना ना भूलें। इसी गुफा में बर्फ से बना प्राकृतिक “शिवलिंग” मौजूद है। चंन्द्रमा के घटने और बढने के साथ साथ इस बर्फ के शिवलिंग का आकार भी घटता या बढता है, मई और अगस्त के बीच यह शिवलिंग काफी ऊँचा हो जाता है। यह गुफा लग भग 5000 साल पुरानी है, और यह मान्यता है कि इसी गुफा में भगवान शिव ने देवी पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। इनके अलावा देवी पार्वती और देव गणेश के बर्फ के लिंग भी मौजूद है। यह स्थान भारतीय सेना, भारतीय अर्धसैनिक बलों और सी.आर.पी.एफ द्वारा संरक्षित है। जिसके कारण यात्री, अमरनाथ गुफा के दर्शन से पहले उच्च अधिकारियों से अनुमति प्राप्त कर लें।

अमरनाथ जाने के साधन

अमरनाथ जाने के लिए रेल मार्ग, और हवाई मार्ग दोनों की सेवा उपलब्ध है। श्रीनगर हवाई अड्डा अमरनाथ के लिए सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा है, जहाँ दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतराष्ट्रिय हवाई अड्डे से श्रीनगर के लिए नियमित उडानों की सेवा उपलब्ध है। जम्मू तवी रेलवे स्टेशन अमरनाथ का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जहाँ भारत के कई शहरों के लिए ट्रैनों की आवा जाही लगी रहती है। 

 

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