नारा नाग को नारायण नाग के रूप में जाना जाता है। यह सुंदर वसंत खग के पास स्थित है। इस स्त्रोत को तोषामैदान झील से जुड़ा हुआ माना गया है। कहा जाता है कि यहां के पानी का स्त्रोत जमीन के काफी नीचे से है। यहां के स्थानीय लोगों में किंवदंती है कि एक बार एक तपस्वी थैले में भेड़ का गोबर लेकर जा रहे थे।
अचानक धोखे से वह गोबर पानी में गिर गया, कुछ दिनों तपस्वी ने देखा कि पानी की सतह पर गोबर ही गोबर दिख रहा है। इसकी पुष्टि करने के लिए उन्होने पानी में हल्दी डाली और पाया कि कुछ टाइम के बाद पानी पूरा पीला हो चुका था। इससे यहां के लोगों में पानी को लेकर कई विश्वास और अन्धविश्वास है।



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