यह कब्र शहर के पोसखर गांव में बनी हुई है जिसे पहले लूडो रैना के नाम से जाना जाता था। लतीफ - उद - दीन,बाबा शेख उल आलम के करीबी शिष्यों में से एक था जिन्होने धर्म के लिए घर और परिवार छोड़ दिया और कई वर्षो तक गुफा में तपस्या करते रहे। बाद में इस गांव में आकर वह रहने लगे। यहां उनकी मौत होने के बाद कब्र बना दी गई। हर साल हिंदू कैलेंडर के 7 वें महीने में यहां उर्स का आयोजन किया जाता है इस दौरान काफी श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।



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