बिजोलिया बूंदी से 48 किमी दूर चित्तौडगढ़ रास्ते पर स्थित है। यह चौहान शासन के दौरान कला, वास्तुकला का मुख्य केंद्र था। बिजोलिया की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इस शहर तक पहुंचने के लिए एक पठार को पार करके जाना पड़ता है। बिजोलिया में तीन मंदिर हैं जिनका निर्माण चौहान शासकों द्वारा तेरहवीं शताब्दी में करवाया गया था। ये सभी मंदिर भगवान् शिव को समर्पित हैं। मंदिर क्षेत्र के पास पानी का एक शांत तालाब है।



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