चेन्नई के त्रिपलीकेन में बना पार्थसारथी मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर को 8वीं शताब्दी में बनवाया गया था।
पार्थसारथी एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है अर्जुन का सारथी। महाभारत की लड़ाई में भगवान कृष्ण भी अर्जुन की सारथी का हिस्सा थे। त्रिपलीकेन स्थित भगवान कृष्ण का मंदिर राजा नरसिम्हावर्मण प्रथम द्वारा मान्यताप्राप्त था। मंदिर के अंदर भगवान विष्णु, कृष्णा, नरसिम्हा, राम और वराह के विभिन्न अवतारों को रखा गया है। भगवान राम और भगवान नरसिम्हा के तीर्थ स्थल के लिए अलग प्रवेश द्वार बना हुआ है।
चेन्नई का सबसे पुराना निर्माण होने के कारण भी इस मंदिर की प्रसिद्धी है। इसी कारण से यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। इसके अलावा मंदिर के स्तंभों और दीवारों पर बेहतरीन नक्काशी भी की गई है।



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