चेरापूँजी के समीप नोहकालीकाई झरना भारत का सबसे ऊँचा झरना है। चेरापूँजी प्रतिवर्ष की भारी बारिश के लिये जाना जाता है और इस झरने के जल का स्रोत यही बारिश है। इसलिये दिसम्बर से फरवरी के मध्य के सूखे समय में यह झरना काफी हद तक सूख जाता है। झरने के ठीक नीचे नीले-हरे रंग के पानी वाले तैरने के क्षेत्र बन गये हैं।
इस झरने के पास स्थित खड़ी चट्टान से छलाँग लगाने वाली स्थानीय लड़की का लिकाई के नाम पर इस झरने का नाम नोहकालीकाई पड़ा।
पहले नोहकालीकाई झरने के पार स्थित एक दूर के स्थान से देखा जाता था लेकिन हाल ही में ऐसी सीढ़ियाँ बनाई गई है जो आपको झरने के ठीक नीचे तक ले जाती हैं। स्पॉन्डिलाइटिस और अस्थमा जैसी बीमारियों वाले लोगों को नीचे नहीं जाने की सलाह दी जाती है क्योंकि सैकड़ों सीढ़ियाँ वापस चढ़ना काफी कठिन हो जाता है।
क्षेत्र के आस-पास कई भोजन के स्थान या रेस्तराँ हैं जहाँ आपको स्थानीय खासी व्यञ्जनों से लेकर, उत्तर और दक्षिण भारतीय व्यञ्जन और यहाँ तक कि चाइनीज़ नूडल्स भी आसानी से मिल जायेंगें। यहाँ पर कई छोटी दुकानें हैं जहाँ से आप क्षेत्र के स्थानीय उत्पादों के खरीद सकते हैं।



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