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छत्तीसगढ़ – प्रकृति, पुरातत्व और जनजातियों का एक परिपूर्ण मिश्रण

छत्तीसगढ़ भारत का दसवां सबसे बड़ा और सोलहवां सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है। भारत के विद्युत् और स्टील उत्पन्न करने वाले राज्यों में से एक छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना 1 नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से विभाजन के बाद हुई। रायपुर इसकी राजधानी है तथा इसकी सीमाएं मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, उड़ीसा, झारखंड और उत्तरप्रदेश से लगी हुई हैं।

छत्तीसगढ़ को मुख्य रूप से दक्षिण कोसाला के नाम से जाना जाता था जिसका उल्लेख रामायण और महाभारत में मिलता है। छत्तीसगढ़ीं देवी मंदिर में 36 स्तंभ हैं जिसके आधार पर इसका वर्तमान नाम पड़ा।

जलवायु और भौगोलिक स्थिति

छत्तीसगढ़ के उत्तरी और दक्षिणी भाग पहाड़ी हैं। लगभग आधा राज्य पर्णपाती वनों से घिरा हुआ है। गंगा के तटीय मैदान और महानदी नदी का मुहाना छत्तीसगढ़ के विभिन्न भागों से बहते हैं और यहाँ की मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं।  छत्तीसगढ़ की जलवायु मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय है। गर्मियों का मौसम कुछ गर्म होता है जबकि ठण्ड का मौसम खुशनुमा होता है।

मानसून में औसत वर्षा होती है। पर्यटक नवंबर से जनवरी के बीच यहाँ की सैर कर सकते हैं। यह समय यहाँ की यात्रा के लिए उत्तम होता है।  छत्तीसगढ़ रेलमार्ग और रास्ते द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। इस राज्य से 11 राष्ट्रीय महामार्ग गुज़रते हैं तथा यह विभिन्न पड़ोसी राज्यों से राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है।

यहाँ का मुख्य स्टेशन बिलासपुर है तथा बिलासपुर के अलावा दुर्ग और रायपुर से भी भारत के विभिन्न शहरों के लिए रेल सेवा उपलब्ध है। रायपुर में स्थित स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा राज्य का एकमेव हवाई अड्डा है जो वाणिज्यिक हवाई सेवा प्रदान करता है।

छत्तीसगढ़ पर्यटन के विभिन्न पहलू

राज्य के विभिन्न भागों में की गई पुरातात्विक खुदाई से पता चलता है कि छत्तीसगढ़ की सभ्यता प्राचीन है। यहाँ प्राकृतिक सुन्दरता की कोई सीमा नहीं है। यह प्रचुर मात्रा में वन्य जीवन, वन, पर्वत और जलप्रपात हैं। कुछ जलप्रपातों में चित्रकूट प्रपात, तीरथगढ़ प्रपात, चित्रधारा प्रपात, ताम्रा घूमर प्रपात, मंडवा प्रपात, कांगेर धारा, अकुरी धारा, गावर घाट प्रपात और रामदाहा प्रपात शामिल हैं।

समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण मंदिर और स्मारक भी छत्तीसगढ़ के पर्यटन का एक भाग हैं। इनमें से अभी भी कुछ अज्ञात हैं जो पर्यटकों को भारत का हृदय को खोजने का अद्भुत अवसर प्रदान करते हैं। पुरातात्विक महत्व की दृष्टि से मल्लहार, रतनपुर, सिरपुर और सरगुजा की सैर करना महत्वपूर्ण है। प्रकृति प्रेमियों के लिए बस्तर सबसे उत्तम स्थान है। यहाँ गर्म पानी के झरने और गुफाएं हैं जो पर्यटकों को आकर्षित करती करती हैं।

जगदलपुर में स्थित इंद्रावती नेशनल पार्क और कांगेरघाटी नेशनल पार्क, रायगढ़ में स्थित गोमर्दा संरक्षित वन क्षेत्र, बिलासपुर में स्थित बारनवापारा वन्य जीवन अभ्यारण्य, अचानकमार वन्य जीवन अभ्यारण्य और धमतरी में स्थित सीतानदी वन्य जीवन अभ्यारण्य राज्य में स्थित कुछ प्रसिद्ध वन्य जीवन अभ्यारण्य और नेशनल पार्क हैं।

कोतुमसर गुफाएं, गाड़िया पर्वत, कैलाश गुफाएं और कुछ अन्य गुफाएं या तो प्राचीन काल की पेंटिंग्स के लिए प्रसिद्ध हैं या तीर्थस्थान के रूप में प्रसिद्ध हैं। कवर्धा में स्थित भोरामदेव मंदिर, रायपुर में चंपारन, जांजगीर – चंपा में स्थित दामुधारा, दंतेवाडा में स्थित दंतेश्वरी मंदिर, महामाया मंदिर कुछ प्रमुख धार्मिक स्थान है जहाँ पूरे वर्ष भक्त दर्शन के लिए आते हैं।

जगदलपुर में स्थित मानव विज्ञान संग्रहालय बस्तर जनजाति की जीवन शैली और संस्कृति पर प्रकाश डालता है। बस्तर महल जगदलपुर का एक अन्य आकर्षण है। किसी समय यह बस्तर साम्राज्य का मुख्यालय था हालाँकि अब यह पूर्ण रूप से सरकार के संरक्षण में है। यह सब कुछ और कुछ अन्य चीज़े बस्तर के पर्यटन को लोकप्रिय बनाती हैं।

छत्तीसगढ़ – लोग, संस्कृति और त्योहार

छत्तीसगढ़ पर्यटन इस क्षेत्र के निवासियों पर प्रकाश डालता है। यहाँ मुख्य रूप से ग्रामीण लोग रहते हैं। यहं प्रमुख रूप से गोंड, हल्बी, हल्बा, कमार और ओरों जनजातियाँ रहती हैं। शहरी लोग हिंदी भाषा बोलते हैं जबकि गाँव के लोग छत्तीसगढ़ी, हिंदी की उपभाषा बोलते हैं। कुछ जनजातियाँ कोसली, उडिया और तेलुगु भाषा भी बोलती हैं।

हालाँकि यहाँ की महिलायें ग्रामीण क्षेत्रों से हैं परन्तु फिर भी वे स्वतंत्र और स्पष्टवादी हैं। यहाँ के अधिकाँश प्राचीन मंदिर देवियों को समर्पित हैं जो यहाँ प्राचीन काल से महिलाओं के दिए जाने वाले सम्मान को प्रदर्शित करते हैं।कुछ ग्रामीण लोग जादू टोने में विश्वास रखते हैं।यहाँ विभिन्न संप्रदायों के लोग रहते हैं। चंपारन धीरे धीरे गुजराती समाज में लोकप्रिय हो रहा है क्योंकि यह स्थान संत वल्लभाचार्य का जन्म स्थान है।

जिस स्थान पर राज्य उड़ीसा के साथ जुड़ा हुआ है वहां उड़िया संस्कृति का प्रभाव देखने मिलता है। कोसा सिल्क साड़ी और सलवार सूट पूरे भारत में लोकप्रिय है। पंथी, रावत नाचा, कर्मा, पंडवानी, चैत्र, कक्सर छत्तीसगढ़ के स्थानीय नृत्य के कुछ प्रकार हैं। यहाँ के लोगों की रूचि थियेटर की ओर भी है। छत्तीसगढ़ को “मध्य भारत का धान का कटोरा” भी कहा जाता है।

पारम्परिक और जनजाति खाद्य पदार्थों में मुख्य रूप से चांवल और चांवल के आटे का उपयोग किया जाता है। स्थानीय मिठाई और शराब भी यहाँ लोकप्रिय है। छत्तीसगढ़ के शहरी लोग अनेक औद्योगिक क्षेत्रो जैसे बिजली, स्टील, एल्युमीनियम तथा प्राकृतिक संसाधनों जैसे खनिज और वन में लगे हुए हैं। यह राज्य शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रगतिशील है। पूरे छत्तीसगढ़ में कई शिक्षण संस्थाएं फ़ैली हुई हैं।

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