यह हिमाचल प्रदेश के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मंदिर एक नागिन भगवान को समर्पित है। मंदिर को 12 वीं शताब्दी में बनाया गया है। समुद्र स्तर से इसकी ऊंचाई 5500 फुट है। पास में ही स्थित पद्दार मैदान और चमेरा पन बिजली संयत्र भी यहां का मुख्य आकर्षण है।
इस मंदिर को लकड़ी पर नक्काशी करके बनाया गया है। पौराणिक मान्यता वाली महाभारत को यहां छत पर लटकाया गया है जो पर्यटकों के कौतूहूल का विषय बना रहता है। यहां के मंडप में कई चित्र बने रहते है जिनमें कौरव और पांडवों की छवि भी बनी है।



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