नई दिल्ली का राष्ट्रीय संग्रहालय देश के सबसे संग्रहालयों में से एक है। सन् 1949 में दिल्ली में स्थापित इस संग्रहालय में कई प्रकार की रोचक चीजें प्रदर्शित हैं। सांस्कृतिक मंत्रालय के अधीन कार्यरत यह मौलाना आज़ाद रोड और जनपथ के किनारे पर स्थित है और इसमें प्राग-ऐतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग की विभिन्न प्रकार की कलाओं को प्रदर्शित किया गया है।
इतिहास के कुछ बिन्दु...
इस सब की शुरुआत 1947-48 में लंदन में आयोजित भारतीय वस्तुओं की प्रदर्शिनी के साथ हुई। रॉयल अकादमी, लंदन में आयोजित इस प्रदर्शिनी के संचालक ने इस प्रदर्शिनी में प्रदर्शित अनोखी वस्तुओं को उनके मूल संग्रहालयों में वापस करने से पूर्व भारत में प्रदर्शित करने का निश्चय किया। जिसके परिणामस्वरूप ये सभी वस्तुयें दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शित की गईं। इस प्रदर्शिनी ने इतने अधिक पारखियों को आकर्षित किया कि दिल्ली में ही राष्ट्रीय संग्रहालय को बनाने का निश्चय किया गया। इसप्रकार राष्ट्रीय संग्रहालय उसी वर्ष अस्तित्व में आया और इसका उद्घाटन भारत के तत्कालीन गवर्नर चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने किया था। हलाँकि, वर्तमान संग्रहालय की इमारत 1960 में बनकर तैयार हुई और उसके पश्चात इसे जनता के लिये खोला गया।
संग्रहित वस्तुयें...
वर्तमान में संग्रहालय मे दो लाख से ज्यादा भारतीय और विदेशी मूल की वस्तुयें प्रदर्शित हैं। इनमें 2700 ईसा पूर्व के टेराकोटा और काँस्य से बनी वस्तुयें, मौर्य काल की लकड़ी की मूर्तियाँ, दक्षिण भारत के विजयनगर की कालात्मक वस्तुयें, गुप्तकाल, सिन्धु घाटी सभ्यता, मुगलकाल, गन्धर्वकाल और कई अन्य समय की प्राचीन वस्तुयें प्रदर्शित हैं।
संग्रहालय के अन्दर ही बौद्ध कला भाग में उत्तरप्रदेश के बस्ती से खुदाई में मिले बुद्ध से सम्बन्धित कई वस्तुयें भी प्रदर्शित हैं।
कुछ रोचक प्रदर्शित वस्तुओं में मोहनजोदड़ो की नृत्य करती मूर्ति, जनजातीय कलायें और गहने, सूक्ष्मकला की वस्तुयें, भित्तिचित्र, कपड़े, वाद्ययन्त्र, हथियार और प्रसिद्ध मुगल शासक जहाँगीर द्वारा हस्ताक्षरित कुछ बहुत ही प्रभावशाली यादगार वस्तुयें शामिल हैं।
इस संग्रहालय में संग्रहित वस्तुयें चित्रकारी, गहनों, पुरातत्व, पांडुलिपियों, हथियार और औजार जैसी कई श्रेणियों के अन्तर्गत आते हैं। पूरे तीन मंजिलों पर के क्षेत्रफल पर फैले इस सुन्दर संग्रहालय की वस्तुओं को देखने और प्रशंसा करने के लिये एक दिन का समय शायद कम पड़ेगा।
संग्रहालय आम लोगों के लिये प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से साँय 5 बजे तक खुला रहता है और सोमवार को यहाँ अवकाश रहता है।



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