विशाल ब्रह्मपुत्र के पीकाक टापू पर स्थित उमानंद मंदिर अपनी वास्तुश्ल्पिीय विशेषता के लिए जाना जाता है। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर का निर्माण अहोम राजा गदाधर सिंह के शासन काल में बार पुकान गढ़गन्य हंदीक्यू ने किया था। यहां हर साल फरवरी के महीने में पड़ने वाली शिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालू आते हैं। मंदिर तो अपने आप में खूबसूरत है ही, पर मंदिर के चारों ओर बहने वाले ब्रह्मपुत्र का नजारा मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है।
अगर आप यह मंदिर घूमने जा रहे हैं तो शाम के समय जाइए, जब सूरज डूब रहा हो। मंदिर की दीवार पर की गई ढेरों नक्काशी काफी रोचक है। हिंदू धर्म के भगवान सूर्य, शिव, गणोश और देवी सहित कईयों की छवि को दीवार पर उकेरा गया है। मंदिर तक सिर्फ और सिर्फ नाव या स्टीमर के जरिए ही पहुंचा जा सकता है।



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