पृथ्वीराज का किला, हिसार जिले के हांसी के शहर में स्थित है। जैसे के नाम खुद दर्शाता है यह किला 12 वीं सदी के प्रसिद्ध राजपूत योद्धा, पृथ्वीराज द्वारा बनाया गया था। इसको जॉर्ज थॉमस ने 1798 में दोबारा बनवाया जब उसने हंसी को अपनी रियासत की राजधानी बनाया जिसमें हिसार और रोहतक शामिल थे। जॉर्ज थॉमस को परास्त करने के बाद ब्रिटिश सेना ने इस किले को छावनी में तब्दील कर दिया गया था।
हालांकि, 1857 के विद्रोह के दौरान ब्रिटिश ने इसको छोड़ दिया गया था। चौकोर आकार का किला, 30 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जो 52 फुट ऊँची और 37 फुट मोटी दीवार से घिरा हुआ है। प्राचीन भारत के सबसे मजबूत किलों में से एक था। पृथ्वीराज चौहान की हार के बाद इसमें एक मस्जिद बनवाई गई थी।
किले के दरवाजे को अच्छी तरह से पक्षियों और जानवरों व हिंदू देवी देवताओं की सुंदर छवि के साथ नक्काशी की गई है। बाद में फिरोज शाह तुगलक ने रणनीतिक कारणों की वजह से हिसार के हांसी जोड़ने वाली एक सुरंग का निर्माण कराया था। किला में भगवान बुद्ध और भगवान महावीर की मूर्तियाँ भी हैं। अष्टधातु से बनी 57 जैन मूर्तियों 1982 की खुदाई के दौरान बरामद की गयी थी। इस किले को 1937 में भारतीय पुरातत्व विभाग ने राष्ट्रीय महत्व का एक संरक्षित स्मारक घोषित किया था।



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