भगवान् महावीर संग्रहालय का निर्माण वर्ष 1982 में किया गया और कडपा का यह अत्यधिक प्रसिद्ध स्थल है। यह संग्रहालय जैन समुदाय के संयुक्त प्रयास से निर्मित किया गया जिन्होंने इस संग्रहालय के निर्माण के लिए बड़ी संख्या में दान दिए। इस संग्रहालय में जैन धर्म से संबंधित प्राचीन कला एवं स्थापत्य कला के कई टुकड़े रखे गए हैं।
संग्रहालय के अंदर पत्थरों पर खोदकर बनाई गई मूर्तियाँ, कांस्य के बने हुए चिन्ह, मिट्टी की मूर्तियाँ, छोटी छोटी गोलियां जिन पर शास्त्र और शिलालेख खुदे हुए हैं, आदि रखे गए हैं। ये सभी वस्तुएं बहुत प्राचीन है, जब भारत में जैन धर्म फलफूल रहा था। इस संग्रहालय में भारत के विभिन्न भागों से वस्तुएं लाई गई हैं, इनमें नंदलूर, गुन्द्लुरु, थिम्मयापलेम, अत्तिराला, मनतमपामपल्ली, पोली, कोलाथुर आदि स्थान सम्मिलित हैं। ये वे स्थान है जो पांचवीं से अठारहवीं शताब्दी के मध्य फलते फूलते शहर थे।
भगवान महावीर संग्रहालय में रखी गई वस्तुएं पुरातात्विक खुदाई के दौरान प्राप्त हुई हैं और इनके प्रदर्शन हेतु इन्हें कडपा लाया गया। कुछ असाधारण कलाकृतियाँ जो इस संग्रहालय में राखी गई हैं उनमें भगवान् गणेश की एक मूर्ती है जिनके पैर हाथी जैसे दिखाए गए हैं, भगवान् हनुमान जी की एक मूर्ती है जिसमें उनके बालों को एक चोटी की तरह गूंथा गया है और भगवान् शिव की एक मूर्ती है जिसमें गंगा नदी को उनके किनारे से निकलता हुआ दिखाया गया है न कि उनके शीर्ष से।



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