कल्लिल देवी मंदिर कालाडी से 22 किमी दूर स्थित है। यह 9 वीं शताब्दी में निर्मित एक जैन मंदिर है। मलयालम में कल्लिल का मतलब पत्थर होता है। मंदिर 28 एकड़ भूखंड में स्थित है और विशाल चट्टान को काट कर बनाया गया है। मंदिर तक पहुँचने के 120 सीढि़यां चढ़नी पड़ती हैं, जो चट्टानों को काट कर बनायी गई हैं।
मंदिर के मालिक कल्लिल पिशार्दी परिवार हैं, पिशार्दी एक ब्राह्मण जाति है, जो जैन धर्म में अपनी मान्यताएं रखती है। पूजा की मुख्य देवी दुर्गा देवी हैं। पार्श्वनाथ, महावीर, और पद्मावती देवी जिन्हें भगवती देवी के रूप में भी जाना जाता है पूजा के अन्य देवता हैं।
चट्टान पर ब्रह्मा की छवि खुदी हुई है। इस मंदिर में पूजा कभी रात में नहीं की जाती है और आम तौर पर दिन के दौरान दोपहर से पहले की जाती है। पूजा के बाद मंदिर बंद कर दिया जाता है। मंदिर का वार्षिक उत्सव नवंबर और दिसंबर के महीने में आठ दिनों के लिए मनाया जाता है। मादा हाथियों पर देवता की मूर्ति ले जाते हुए एक भव्य जुलूस निकाला जाता है।



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