भारत - पुर्तगाली संग्रहालय सद्भाव का एक उदाहरण है जो दो देशों और दो संस्कृतियों के बीच मौजूद है। इयह इस बात का भी उदाहरण है कि पुर्तगाली संस्कृति ने किस प्रकार कोच्चि के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जो विश्व के उत्तम बंदरगाह शहरों में से एक है।
इस संग्रहालय में कलाकृतियों, दस्तावेजों और अवशेषों का प्रदर्शन किया गया है जो यह सिद्ध करता है कि पुर्तगाली व्यापारियों ने कोच्चि के इतिहास पर न मिटने वाली छाप छोड़ी है। यह संग्रहालय डॉ. कुरीथरा का स्वप्न था जो कोच्चि के बिशप भी थे।
इस संग्रहालय के निर्माण का एक मुख्य उद्देश्य यह बताना भी था कि उस समय भी दो देशों के बीच सांस्कृतिक सद्भाव था। इस संग्रहालय की सैर पीढ़ियों को यह सिखाती है कि किस प्रकार दो या दो से अधिक देश सांस्कृतिक और धार्मिक सद्भाव के साथ सहास्तित्व में रह सकते हैं। यह संग्रहालय पुरातत्वविदों को भी प्रसन्न करता है क्योंकि यहाँ उस समय का उत्तम शिल्प कौशल देखने को मिलता है जो उत्तम गुणवत्ता की सागौन की लकड़ी पर किया गया नाज़ुक काम है।



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