कालीकट - कहानियों और इतिहासों की भूमि

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कालीकट जिसे कोज़ीकोड के नाम से भी जाना जाता है, एक उत्तरी जिला है जो भारत के दक्षिण – पश्चिम तटीय प्रदेश में स्थित है। इस जिले का मुख्यालय भी इसी नाम से जाना जाता है जैसे कालीकट शहर। पश्चिम की ओर अरब सागर से घिरा यह क्षेत्र बीते युग में व्यापार और वाणिज्य का शानदार केंद्र था।

आधुनिक इतिहासकारों के अनुसार कालीकट अपने मसालों और रेशम के लिए जाना जाता था – यही कारण है कि इसने हिंद महासागर के कई देशों के साथ सफल व्यापारिक संबंध स्थापित किए। कई अफ्रीकी, एशियाई और मध्य पूर्व के देशों के साथ मज़बूत व्यापारिक संबंधों ने कालीकट को उसके सुनहरे दिनों का एक प्रसिद्द आर्थिक केंद्र बना दिया।।

औपनिवेशिक काल के दौरान कालीकट ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के तहत आया और मद्रास प्रेसीडेंसी के तहत प्रशासित किया गया। कालीकट का विश्व के इतिहास में भी योगदान है क्योंकि यहाँ के कप्पड (कालीकट से 18 किलोमीटर की दूरी पर) स्थान पर वर्ष 1498 में पुर्तगाली नाविक वास्को दा गामा उतरा था। उस स्थान पर एक स्मारक बनाकर इस ऐतिहासिक क्षण को सम्मानित किया गया जो कालीकट का प्रमुख पर्यटन आकर्षण है।

शानदार संस्कृति, बढ़िया व्यंजन

वे सभी चीज़ें जिनके लिए कालीकट प्रसिद्द है वह है इसकी संस्कृति और व्यंजन जो यात्रियों और इतिहासकारों का ध्यान समान रूप से अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यह क्षेत्र विश्व प्रसिद्द लोकगीतों वदक्कन पत्तुकल का जन्म स्थल है। कालीकट समृद्ध इस्लामी कला रूपों के साथ पनपता है जो इस क्षेत्र के सांस्कृतिक इतिहास की विशिष्टता में योगदान देता है। ओप्पना (एक मुस्लिम नृत्य का प्रकार) और मप्पिलापत्तुकल (मुस्लिम गाना) और गज़ल इस स्थान की लोकप्रिय इस्लामी कला के रूप हैं। इस शहर में कई प्रगतिशील साहित्यिक आंदोलन हुए हैं जिसने अनेक प्रसिद्द क्षेत्रीय लेखकों को जन्म दिया है।

सांस्कृतिक रूपों के अलावा कालीकट के लोग अपने फुटबॉल प्रेम और अतिथी सत्कार सेवा के लिए जाने जाते हैं। कई परंपराओं जैसे अरबी और चीनी का सम्मिश्रण होने के कारण कालीकट एक असाधारण उत्कृष्ट पाक संस्कृति का आनंद उठता है। यहाँ कोज़ीकोड हलवा (आटे से बना हुआ एक मिष्ठान्न जो कई जायकों में आता है) मिलता है और किसी भी यात्री को इस स्वर्गीय आनंद का स्वाद लेने से नहीं चूकना चाहिए। अन्य खाद्य पदार्थ जो कालीकट को विश्व में प्रसिद्द बनाता है वह है इसकी मालाबार बिरयानी जो इस जिले के लगभग सभी रेस्टारेंट में मिलती है। समुद्री खाद्य, पथिरी, केले के चिप्स और घी चाँवल कुछ अन्य आनंद हैं जिससे कोई भी यात्री चूकना नहीं चाहेगा।

पर्यटन स्थलों का भ्रमण रमणीय बनाएँ

कालीकट उन लोगों के लिए सच्चा स्वर्ग है जो पैदल ही इस स्थान की सैर करना चाहते हैं। इस जिले के चर्च, मंदिर, सड़कें और स्मारक अपने रंग और इतिहास से यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। बेपोर और कप्पड़ बीच अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आमोद – प्रमोद के कारण आगंतुकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कदलुन्दी पक्षी अभयारण्य में पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं जो पक्षी प्रेमियों के उत्साह को बढाती हैं। परिवार के साथ पिकनिक पर जाने और एक दिन की ट्रिप पर जाने के लिए तुषारागिरी वॉटरफॉल और पेरुवन्न्म्मुझी बाँध उपयुक्त स्थान हैं।

कालीकट का एक अन्य अवश्य देखने योग्य आकर्षण मित्तई थेरुवु (एस एम स्ट्रीट के नाम से प्रसिद्द) है जो शहर का प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र है और शॉपिंग के लिए आदर्श स्थान है। कालीकट के अन्य लोकप्रिय आकर्षणों में थिक्कोटी लाइट हाउस, मनाचिरा स्क्वेयर, पज़ह्स्सीराजा संग्रहालय, कलिपोयिका लॉयंस पार्क, तली मंदिर, कक्कयम, कृष्णा मेनन संग्रहालय और ताराघर शामिल हैं।

एक आदर्श रमणीय स्थान

एक व्यस्त दिन को समाप्त करने का उत्तम तरीका यह है कि शाम कालीकट बीच पर हवा का आनंद लेते हुए और सूर्यास्त को देखते हुए बिताई जाए। कालीकट में विश्व प्रसिद्द रेस्टारेंट हैं जहाँ यात्री मालाबार के विभिन्न स्वादों का आनंद उठा सकते हैं। इस शहर में कई सस्ते होटल हैं जो किफ़ायती दर पर रहने की सुविधा प्रदान करते हैं।

कैसे पहुंचें कालीकट 

कालीकट हवाई मार्ग, रेल और रास्ते द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यह शहर भारत के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है और यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है।

कालीकट जाने का सबसे अच्छा समय

इस क्षेत्र का मौसम खुशनुमा और यात्रियों के लिए उपयुक्त है। अपने ऐतिहासिक स्मारकों, लंबे विस्तृत समुद्र तटों, उत्तम भोजन, गूंजती हुई सड़कों, जीवंत संस्कृति और अच्छे स्वभाव वाले रहवासियों के कारण कालीकट यात्रियों को वह सब कुछ या उससे भी ज़्यादा उपलब्ध कराता है जिसकी वे अपेक्षा करते हैं।

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