अर्जुन तपस्या का निर्माण, 7 वीं सदी में किया गया था जो 43 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, इस स्थान पर खुली जगह पर एक पत्थर का खंभा रखा हुआ है। इसे गंगा के अवतरण के नाम से भी जाना जाता है। इस स्थान के नाम रखे जाने पीछे दो कहानियां है - एक पक्ष का मानना है कि इस स्थान का नाम पांडव अर्जुन के नाम पर रखा गया, जिन्होने भगवान शिव का हथियार पाने के लिए काफी कठिन तपस्या की थी ताकि उस हथियार से उनके शत्रुओं का वध किया जा सकें।
वहीं दूसरे पक्ष का मानना है कि राजा भागीरथी ने गंगा को धरती पर लाने के लिए यहां खड़े होकर तपस्या की थी, ताकि उनके पूर्वजों की आत्मा को शांति मिल सकें। इस स्थान पर असाधारण सुंदरता वाली मूर्तियों को देखा सकता है जिन्हे कुशल मूर्तिकारों ने बनाया है।
इस स्थान के आसपास 100 से अधिक चित्र बने है जिनमें भगवान से लेकर पक्षी तक को चित्रित किया गया है। यहां पर गंगा के धरती पर अवतरण को भी दर्शाया गया है, जमीन से दो फांक में एक चट्टान पानी की धाराओं को बांट देती है।



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