औनियाती सतरा माजुली का एक प्रमुख सतरा है। इसकी स्थापना 1653 में निरंजन पाठकदेव ने की थी। यह सतरा पालनाम और अप्सरा नृत्य के लिए जाना जाता है। नवंबर में मनाया जाने वाला पालनाम सतरा का सबसे प्रमुख धार्मिक उत्सव है। सतरा के मुख्य प्रार्थना कक्ष में सुबह से शाम तक प्रार्थनाएं होती है। रोचक बात यह है कि यह परंपरा पिछले 350 सालों से नियमित चली आ रही है।
मुख्य प्रार्थना कक्ष (नाम घर) में होने वाली सत्तरिया नृत्य भगवान गोविंदा को समर्पित होता है। पालनाम के अलावा यहां रास लीला, जन्माष्ठमी, होली और बोहग बीहू (असमिया का नया साल) जैसे धार्मिक त्योहारों का भी आयोजन किया जाता है। औतियानी सतरा असम के बर्तन, हैंडीक्राफ्ट और आभूषणों के विशाल संकलन के कारण भी काफी प्रसिद्ध है। उत्तरी लखिमपुर के धेमाजु और लूत-खाबोलुघाट से इस सतरा तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।



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