अष्टपद का अर्थ होता है-आठ कदम। जैन धर्मग्रंथ के अनुसार बर्फ से ढकी हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं में कहीं पर अष्टपद अध्यात्मिक केंन्द्र है। यह कैलाश पर्वत जाने के क्रम में बद्रीनाथ से 168 मील उत्तर की दिशा में है। ऐसी मान्यता है कि यह मानसरोवर झील से करीब 7 मील दूर है, जो कि अब चीन के अधिकार क्षेत्र में आता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार इस स्थान पर पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव को मुक्ति मिली थी। बाद में उनके बेटे महाराजा भरत चक्रवर्ती ने अष्टपद पहाड़ पर एक महल का निर्माण करवाया और उसे हीरों से सजाया। ऐसी भी एक मान्यता है कि जो भी अष्टपद का भ्रमण करता है, उन्हें मुक्ति प्राप्त होती है। इसी मान्यता के तहत जैन समुदाय ने पहले तीर्थंकर के जन्म स्थान हस्तिनापुर में अष्टपद की प्रतिकृति बनाई है।
यह शानदार तीर्थ दो दशक में 25 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ था। 151 फीट ऊंचा और 108 फीट के व्यास की इस आकृति तक चार द्वार के जरिए पहुंचा जा सकता है। इसके आठ पद हैं और हर पद की ऊंचाई 108 फीट है।



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