लक्ष्मी नारायण मन्दिर अनोखी स्थापत्य कला का एक और शानदार उदाहरण है जो किले और मन्दिर का सुन्दर मिश्रण है। सन् 1622 में वीर सिंह देव द्वारा निर्मित और सन् 1793 में पृथ्वी सिंह द्वारा पुनर्निर्मित इस मन्दिर की अन्तरिक दीवारें पौराणिक विषयों के उत्कृष्ट भित्त चित्रों के साथ सजी हैं।
लक्ष्मी नारायण मन्दिर की नक्काशियों में भगवान कृष्ण के जीवन को उभारते ज्यामितीय आकृतियाँ हैं जिन्हें जानवरों और फूलों की नक्काशी से सजाया गया है। यह मन्दिर विद्रोह के बाद की प्रसिद्ध चित्रकारियों के लिये भी जाना जाता है।
धन की देवी लक्ष्मी को समर्पित यह लक्ष्मी नारायण मन्दिर इस स्थान का सबसे महत्वपूर्ण पर्यटक आकर्षण है। मन्दिर को राम राजा मन्दिर से जोड़ता एक पत्थर लगा एक सुन्दर मार्ग है। मन्दिर के केन्द्रीय मण्डप में भगवान गणेश की सुन्दर प्रतिमा है जो इस पूरी संरचना को और भी आकर्षक बनाता है। पर्यटक अक्सर मन्दिर की स्थापत्य कला से आश्चर्यचकित हो जाते हैं।



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