पेके टाइगर रिजर्व अरुणाचल प्रदेश में सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में से एक है। यह पूर्वी कामेंग जिले में स्थित है तथा लगभग 862 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह खेलांग वन प्रभाग का एक हिस्सा था तथा इसे 1977 में एक खेल अभ्यारण्य के रूप में घोषित किया गया। बाद में 2002 में इसे एक टाइगर रिजर्व का दर्जा प्रदान किया गया।
वन में
यह बाघ अभयारण्य अरूणाचल प्रदेश में वन्य जीवों की रक्षा एवं संरक्षण के लिए वन अधिकारियों द्वारा किए गए प्रयास का परिणाम है। रिजर्व के जंगल में बाघों के बेहतर रख-रखाव के अलावा भी कई अन्य जानवरों की प्रजातियां जैसे फिशिंग कैट, सियार, जंगली भैंसें, फ्लाइंग स्क्वैरल( गिलहरी),क्लाउडेड तेंदुआ, जंगली कुत्ता, सांभर, हाथी,पांडा, रीसस मकाक बंदर, हिरण और जंगली सुअर आदि भी मौजूद हैं।
पेके टाइगर रिजर्व यहां मौजूद हार्नबिल्स की विभिन्न प्रजातियों के लिये भी प्रसिद्ध है, तथा य़ह पक्षी प्रेमियों को यहां आने के लिये आकर्षित करता है। रिजर्व में दिखाई देने वाले पक्षियों अन्य प्रजातियों में जंगली मुर्गी, कबूतर, खलीज तीतर, बत्तख, चील, ड्रोंन्गो, बार्बिल्स, रंगीला तीतर तथा सफेद पंखों वाला कठफोड़वा शामिल हैं। अजगर, करैत सांप तथा नाग जैसी सरीसृपों की भी कुछ प्रजातियां यहां रिजर्व में पाई जाती हैं।
पेके टाइगर रिजर्व की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय
यहां की वायु प्रदूषण मुक्त होने की कारण इसकी ताजगी की खुशबू पूरे वातावरण में बिखरी रहती है। हालांकि, अभयारण्य की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक होता है।
पेके टाइगर रिजर्व तक कैसे पहुंचे
अभयारण्य के लिए निकटतम हवाई अड्डा तेजपुर में है। पेके टाइगर रिजर्व के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन रंगपारा है। सभी प्रमुख शहरों से बसों की सुविधा उपलब्ध होने के कारण भारत के किसी भी कोने से आने वाले पर्यटकों के लिए इस अभ्यारण की यात्रा आसान है।



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