फ़ेक  - जहाँ होता है प्रकृति और संस्कृति का मिलाप

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नागालैंड भारत के उन अज्ञात हिस्सों में से एक है जिसने अपनी पहाड़ियों, घाटियों और मैदानों में बहुत कुछ संग्रहित कर के रखा है और जहाँ एक बार जाने के बाद आप बार बार जाना चाहेंगे। फ़ेक, नागालैंड के सुरक्षित रखे गए रहस्यों में से एक है जहाँ प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक उत्साह, सब साथ मिलकर एक हो जाते हैं। फ़ेक शहर, फ़ेक ज़िले में आता है जो नागालैंड के दक्षिण पूर्वी हिस्से में स्थित है।

यह ज़िला पूर्व में म्यांमार, दक्षिण में मणिपुर राज्य, पश्चिम में कोहिमा जिले और उत्तर में ज़ुन्हेबोटो और त्युएनसांग जिलों से जुड़ा हुआ है। पहले फ़ेक कोहिमा ज़िले का हिस्सा था और यह कोहिमा शहर से 145 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। फ़ेक का शाब्दिक अर्थ 'वॉच टॉवर' होता है और यह 'फेक्रेकेद्ज़े' शब्द से लिया गया है। फ़ेक के मुख्य निवासी चाकेसंग और पोचुरी हैं। यहाँ तेंयिदी और नागामीस बोली जाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि चाकेसंग किसी एक जनजाति का नाम नहीं बल्कि तीन उप जनजातियों का संयोजन है - चोकरी, खेज़्हा और सांग।

ऐसा सौन्दर्य जो किसी भी यात्री को मोहित कर दे!

यह खूबसूरत ज़िला मुख्य तीन नदियों से सुसज्जित है - तिज़ू, लान्ये और सेद्ज़ु। इसके अलावा यहाँ अन्य पानी का स्रोत और मुख्य पर्यटक आकर्षण में शिल्लोई, चिड़ा और ज़ुदु झीलें भी शामिल है। फ़ेक ऑर्किड की कुछ दुर्लभ प्रजातियाँ पाए जाने के लिए भी लोकप्रिय है। फ़ेक अपनी समृद्ध वनस्पति और जीव जंतु के लिए जाना जाता है। यहाँ तितर की प्रसिद्द प्रजाति ब्लीथ ट्रागोपन भी पाया जाता है। फ़ेक में खुथोन्ये, थुरिन्ये, तुर्हिन्ये, गुन्ये, तुखन्ये और सुखरुन्ये त्यौहार मनाये जाते हैं।

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