यह आकृषक वन्यजीव अभ्ययारण्य दो जिलों पोरबंदर और जामनगर के अंतर्गत आता है। हालांकि, अभयारण्य पोरबंदर से केवल 15 किलोमीटर की दूरी पर है, इसलिए यह जामनगर के मुकाबले पोरबन्दर के ज्यादा नजदीक पड़ता है। यह इलाका जोकि एक आरक्षित वन क्षेत्र है और इसे वर्ष 1979 में एक अभयारण्य का दर्जा प्रदान किया गया था।
यह पहाड़ी इलाकों, समतल मैदानों वाली भूमि और हरे जंगलों एवं कृषि क्षेत्रों से घिरी आकर्षक जल स्रोतों से भरा एक बेहद खूबसूरत स्थल है। अरब सागर से 15 किमी की दूरी पर स्थित, यह वन क्षेत्र, इस क्षेत्र की लवणता विसर्जन को रोकने के लिए एक ढाल के रूप में कार्य करता है।
लुप्तप्राय पशु पक्षी एवं सरीसृपों के साथ-साथ इस अभ्यारण्य में भेड़िया, तेंदुआ, रैटल, मगरमच्छ, गिरगिट, विषैला सांप, कलगी बाज़, ईगल और स्पाटेड ईगल भी दिखाई पड़ते हैं।192.31 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तीर्ण इस अभ्यारण्य में विविध प्रकार के फूल एवं औषधीय पौधों की प्रचुरता है। इसके अलावा, दो पारदर्शी जल से युक्त बिलेश्वरी और जाघरी नदियां इस खूबसूरत स्थल का एक हिस्सा हैं।



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