इस किले को 1855 ई. में राजौरी के पूर्व शासक मियां हाथू ने बनवाया था। शासक मियां हाथू राजैरी क्षेत्र के पूर्व शासक हुआ करते थे। इस किले को बनाने के लिए जाराल राजास ऑफ राजौरी व अन्य किलों की बची हुई साम्रगी को उपयोग में लाया गया था।
किले का निर्माण करने का मुख्य उदे्श्य डोगरा बलों की बाहरी आक्रमण से रक्षा करना था। साथ ही इस किले में किसानों का अनाज भी रखा जाता था। इतिहासकारों के अनुसार, हिंदुओं में पाल वंश के राजा ने इस जगह पर सबसे पहले अधिकार हासिल किया था। किले का बनवाने से कई लाभ थे, राजा की प्रजा की बाहरी शक्तियों से सुरक्षा हो जाती थी, पूरे क्षेत्र का अनाज सुरक्षित रहता था और स्थानीय किसानों के लिए कृषि के क्षेत्र में कई लाभ थे।



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