ज्यादातर मस्जिद का नाम उनके बनाने वाले या फिर उस स्थान के नाम पर रखा जाता है। पर पूरे विश्व के सभी गांवों व शहरों में एक खास प्रकार की मस्जिद होती है, जिसका नाम न ही बनाने वाले और न ही स्थान के नाम पर रखा गया है। इसे जामा मस्जिद कहते हैं। रोहतक जिले के मेयहम कस्बे में भी एक जामा मस्जिद है।
हालांकि इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति है कि इसे किसने और कब बनाया था। मस्जिद में मिलने वाले अभिलेख में दो अगल-अलग निर्माता के नाम लिखे हैं। इससे इसके निर्माण की दो तिथियां सामने आती हैं। सीढ़ी के नीचे बने उपदेश देने वाले स्थान पर मिले अभिलेख के अनुसार इस मस्जिद का निर्माण 1531 में हुमायूं के शासनकाल में किया गया था।
पर मस्जिद के दक्षिणी मेहराब के अभिलेख के अनुसार इस मस्जिद को औरंगजेब के शासनकाल में 1667-68 में बनवाया गया था। अभिलेख के मुताबिक इस मस्जिद को औरंगजेब के आदेश पर उनके शासनकाल के 10वें वर्ष में ख्वाजा रहमत उल्लाह के द्वारा बनवाया गया था। एक और मत के अनुसार इस मस्जिद का अस्तित्व हुमायूं के पहले से ही था।



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