सावनदुर्ग पहाडी का नरसिंह स्वामी मंदिर सैलानियों के लिए प्रमुख आकर्षक स्थल है। सावनदुर्ग पहाडी की तलहटी पर स्थित यह मंदिर एक तीर्थ स्थान है। इस मंदिर में भगवन नरसिंह की पत्थर में बनी प्रतिमा स्थापित है। यात्री यहाँ के शांत वातावरण और नैसगिर्क सौंदर्ययता की और...
यह मंदिर भी सावनदुर्ग पहाडी की तलहटी पर स्थित है। यह प्राचीन मंदिर भगवन वीरभद्रे को अर्पित है। यह स्थान गुफा "खोजकर्ताओं" और “राँक क्लैम्बर्स” के लिए प्रमुख आकर्षक का केन्द्र है। पहाडी की तलहटी पर छोटी सी झील बहती है।
सावनदुर्ग पहाडी के पास स्थित सैयद गुलाम कादरी का मकबरा देकने योग्य स्थान है।यह दोनों मंदिरों के काफी करीब है।
इस जलाशय का निर्माण १९३३ में अर्कावती नदी के ऊपर, भारत रत्ना से सम्मानित सर एम्.विश्वेश्वराय की निगरानी में किया गया था। अगर समय मिले तो इस जलाशय को जरुर देखे। अर्कावती नदी के ऊपर बने इस बांध का उपदेश बेंगलौर के आस पास के क्षेत्रों को सिंचाई के लिए पानी प्रधान...
मनचिंनबेल बाँध अर्कावती नदी पर बनी है। इसका निर्माण सिंचाई के लिए मगडि गाँव को पानी प्रधान करना था। इसे मंचंबेले ओर मंचिनबेले के नाम से भी पुकारा जाता है। यह तिप्पनगौंडनहाली जलाशय के पास है। सिंचाई के लिए उपयुक्त शेत्र को "तोरे सालू" कहते है। कन्नड़ में तोरे का...