कावेरी फिशिंग कैम्‍प - मछली पकड़ने वालों के लिए एक प्रवेशद्वार

कावेरी मत्स्य शिविर, दक्षिण कर्नाटक के जंगलों के बीच शान से बहती हुई कावेरी नदी के पास है। यह जगह प्रकृति प्रेमियों को जंगलों व एकांत के कारण मधुमक्खियों की तरह आकर्षित करती है। हर रोज़ की व्यस्त जि़दगी से निकलकर यहाँ आने वालों को मज़ा, शाति, और संतुष्टि एक समान मिलती है। बंगलोर शहर से 100 कि.मी. दूर, बंगलोर-कोल्लेगला राष्ट्रीय राजमार्ग पर यह शिविर मंड्या जि़ले में स्थित है। हगलूर से 23 कि.मी. दूर यह मत्स्य शिविर कर्नाटक वन लाज तथा रेसार्ट की देखरेख में है। फिशिंग कैम्‍प के मूलभूत तथ्य कावेरी फिशिंग कैम्‍प के अंतर्गत तीन शिविर हैं- भीमेश्‍वरी, गलीबोर और दोद्दमकली। भीमेश्‍वरी और गलीबोर शिविर पर्यटकों के लिए बने हैं जबकि दोद्दमकली शिविर एक सुदूर स्थित कार्पोरेट प्रवेशद्वार के रुप में उन्‍नति कर रहा है। ये तीनों जगह मूल रुप से मत्स्य तथा प्रकृति शिविर हैं। गलीबोर का शिविर भीमेश्‍वरी से लगभग 16 कि.मी. की दूरी पर है जबकि दोद्दमकली शिविर भीमेश्‍वरी से लगभग 6 कि.मी. की दूरी पर है। ये स्थान बहुत पुराने और बीहड़ हैं जहाँ आप शहर से दूर अपना समय बिता सकते हैं।

आप इस शिविर तक सड़कमार्ग या फिर वायु, रेल तथा सड़क की मिलीजुली यात्रा से पहुँच सकते हैं। यह इस पर निर्भर करता है कि आप किस जगह से आ रहे हैं। इसके सबसे पास बंगलोर हवाई अड्डा और मैसूर का रेल जंक्‍शन है। बेहतर अनुभव के लिए आप निजी वाहन से आ सकते हैं। इन शिविरों में झोपड़ियों और टेन्ट की सुविधाएँ हैं। बाहर से आदिमकाल की दिखने पर भी इनके भीतर आपको घर जैसा आराम मिलता है। झोपड़ियों और टेन्टों का रखरखाव बेहद अच्छा है। गलीबोर और दोद्दमकली में आपको बिजली की व्यवस्था नहीं मिलेगी क्योंकि यहाँ सभी काम सौर बल्ब पर निर्भर होते हैं। मत्स्य शिविर आने का सबसे अच्छा समय दिसम्बर और मार्च के बीच का रहेगा। मत्स्य शिविर में होने वाली गतिविधियाँ महासिर मछली को पकड़ना यहाँ की प्रमुख गतिविधि है, क्योंकि यह यहाँ पर बड़ी संख्या में है। महासिर मछली की जनसंख्या लगातार कम हाक रही है जिसकी वजह से यात्री मछली पकड़ने के लिए ‘पकड़ो व छोड़ो‘ तकनीक का प्रयोग करते हैं। मछली पकड़ते ही अपना स्कोर लिखकर उसे छोड़ देते हैं।

कायाकिंग, ट्रैकिंग, हरिगोल की सवारी तथा माउंटेन बाइकिंग जैसी कुछ गतिविधियों का मज़ा आप यहाँ ले सकते हैं। इन गतिविधियों के अलावा आप पक्षियों की 95 प्रजातियाँ, मगरमच्छ तथा कछुआ भी यहाँ देख सकते हैं।यदि आप बाहर घूमना पसंद करते हैं तो यह एक बेहतरीन जगह है जहाँ आप आनंद ले सकते है।

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