श्रवणबेलगोला की यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों को भंडारीबसदी मंदिर जरूर घूमना चाहिए। 266x78 फिट आकार वाला यह मंदिर श्रवणबेलगोला में सबसे बड़े तीर्थ स्थलों में से है। यह मंदिर 1126ई0 में हल(होयसल राजा के खजांची) नें बनवाया था। भंडारीबसदी मंदिर, जो चतुरविमशती-जिनालय के नाम से भी जाना जाता है, में विजयनगर काल के बुक्कारय लेख हैं।
मंदिर पर लिखे लेख जैनों एवं श्री वैष्णवों के मध्य हुए संघर्ष का वर्णन करते हैं। स्थानीय विश्वासों के अनुसार, भंडारीबसदी मंदिर कई चरणों में निर्मित हुआ था। मंदिर पहुंचने पर, भक्तों को सभा मन्तप, अन्तराल, गर्भ गृह तथा मुख मन्तप देखने का अवसर प्राप्त होता है। अन्तराल के भीतर याक्षी, ब्रह्रा तथा पदमावती देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी गई हैं।
इनके अलावा, 3 फिट ऊंची 24 पैगम्बरों की मूर्तियां भी एक सजे हुए पैडस्टल पर रखी हुई हैं। भंडारीबसदी मंदिर में तीन दरवाजे हैं जिन पर पशुओं व मानवों की खूबसूरती से उकेरी गई कलाकृतियों दिखाई देती हैं। भंडारबसदी मंदिर की यात्रा करने वाले भक्तों को प्रवेश द्वार पर 12 भुजाओं वाले देव इंद्र की मूर्ति के दर्शन मिलते हैं। इसके अलावा, इस मंदिर के मुख्य द्वार पर एक मानस्तम्भ भी रखा गया है।



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