यात्रियों के लिए यह सुझाव है कि श्रीरंगापट्नम की ओर जाते हुए पांडवपुर अवश्य जाए।चट्टानों से बनी दो पहाडि़यों के बीच स्थित इस शहर का नाम पांडवपुर इसलिए पड़ा क्योंकि महापुराण ‘महाभारत‘ के नायक ‘पांडव‘ कुछ देर के लिए यहाँ रुके थे।ऐसा माना जाता है कि वनवास के दौरान, पांडव इस शहर में रुके थे और उनकी माता कुंती को यह जगह पसंद थी।
आज़ादी से पहले इस शहर को ‘फ्रेंच राक्स‘ नाम दिया गया क्योंकि अंग्रेज़ों के विरुद्ध टीपू सुल्तान की मदद करने आए फ्रांसीसी लोगों ने यहाँ अपना पड़ाव डाला था।
पांडवपुर के चारों ओर धान व गन्ने के खेत इस जगह को और सुंदर बना देते हैं। इस शहर के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि होने के कारण पर्यटक यहाँ से गुज़रते हुए विविध प्रकार के कृषि उत्पाद, आयुर्वेदिक उत्पाद और हस्तशिल्प देख सकते हैं।



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