तंजावुर का सरस्वती महल पुस्तकालय, एशिया में अपनी तरह का सबसे पुराना पुस्तकालय है। यहां खजूर के पत्तों पर तमिल, मराठी, तेलुगु, मराठी और अंग्रेजी सहित अनेक भाषाओं में लिखी पांडुलिपियों व पुस्तकों का असाधारण संग्रह मौजूद है।
सरस्वती महल पुस्तकालय को 1535-1675 ई. को नायक शासकों के राजकीय पुस्तकालय के रूप में शुरू किया गया था। मराठा शासकों नें शीघ्र ही तंजावुर पर कब्जा कर लिया और सरफोजी द्वितीय (1798-1832) के नियंत्रण में, पुस्तकालय को निखारा गया। 1918 के बाद से, पुस्तकालय तमिलनाडु राज्य के नियंत्रण में है।
पुस्तकालय आम जनता के लिए खुला हुआ है। पुस्तकालय की गतिविधियों का कम्प्यूटरीकरण 1998 में शुरू किया गया। 1791 में छपी मद्रास पंचांग, और सन 1791 में एम्सटर्डम में छपी सचित्र बाइबिल के रूप में कुछ दुर्लभ पुस्तकें पुस्तकालय में उपलब्ध हैं।
पुस्तकालय के महत्व के बारे में लोगों के मध्य जागरूकता उत्पन्न करने हेतु एक संग्रहालय भी पुस्तकालय भवन में स्थित है।



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