तिरुचेंदूर मुरुगन मंदिर इस शहर का मुख्य आकर्षण है। यह भगवान मुरुगन के 6 पवित्र धामों में से एक माना जाता है। यह मंदिर भगवान मुरुगन और उनकी दो पत्नियों, वल्ली तथा दीवानाय को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान शिव और भगवान विष्णु को समर्पित मंदिर भी हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर का अस्तित्व वैदिक काल से है और इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में किया गया है।
इस मंदिर में एक विशाल नौ त्रिस्तरीय गोपुरम अथवा मुख्य प्रवेशद्वार है। इस मंदिर के परिसर में ताज़े पानी के चश्मे के पास एक पवित्र कुँआ, नाझिक्किनारु बना हुआ है। सेंथिलावंदर के रूप में भगवान मुरुगन का मुख पूर्व की ओर है, हालांकि, इस मंदिर का प्रवेशद्वार दक्षिणमुखी है।
इस मंदिर की विशेषता यह है कि केवल यही मुरुगन मंदिर समुद्र के किनारे पर स्थित है जबकि बाकी सभी मुरुगन मंदिर भारत में पहाडि़यों की चोटी और जंगलों में स्थित है। ब्रह्योत्सव, वसन्तोत्सव, विसाका विसाकम, स्कंद षष्ठी, अवनीप्पेरुंथिरुनाल तथा मासीप्पेरुंथिरुनाल और ऊंजल सेवई आदि त्योहार बहुत धूमधाम और भव्यता से मनाए जाते हैं और साथ ही महत्वपूर्ण तीर्थ आकर्षण भी हैं।



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